नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ गाजा संकट को लेकर बहुपक्षीय बैठक की, जिसे उन्होंने अपनी “सबसे महत्वपूर्ण बैठक” बताया। इस बैठक में तुर्की, कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इंडोनेशिया और जॉर्डन के नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य गाजा में जारी संघर्ष को शीघ्र समाप्त करना और क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता स्थापित करना था।
ट्रंप ने बैठक को बताया सबसे अहम:
बैठक में शामिल देशों ने गाजा में युद्ध की स्थिति, संभावित राजनयिक समाधान, मानवीय सहायता और सीजफायर स्थापित करने के तरीकों पर चर्चा की। ट्रंप ने कहा, “यह मेरी सबसे महत्वपूर्ण बैठक है। हमने कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं, लेकिन यह मेरे लिए सबसे अहम है। हमारा लक्ष्य गाजा में युद्ध को जल्द समाप्त करना है।” उन्होंने मुस्लिम देशों के नेताओं से सहयोग और शांति स्थापित करने के लिए संयुक्त कदम उठाने का आह्वान किया।
कतर के अमीर ने की मेजबानी:
कतर के अमीर शेख तमीम ने बैठक की मेजबानी के लिए ट्रंप का धन्यवाद किया और कहा, “हमारे यहां आने का मुख्य कारण युद्ध रोकना और बंधकों को सुरक्षित लौटाना है। हम ट्रंप और उनके नेतृत्व पर भरोसा करते हैं।” अन्य मुस्लिम देशों के नेताओं ने भी संघर्ष रोकने और सीजफायर स्थापित करने के लिए ट्रंप के साथ सहयोग का आश्वासन दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका की भूमिका की सराहना की और शांति स्थापना में सहयोग का भरोसा जताया।
अमेरिका-मुस्लिम देशों के संबंधों में बदलाव:
विश्लेषकों का कहना है कि यह बैठक मध्यपूर्व नीति में अमेरिका की सक्रियता और मुस्लिम देशों के साथ संबंधों में बदलाव को दर्शाती है। गाजा संकट के दौरान ट्रंप की यह पहल अमेरिका के लिए रणनीतिक कदम मानी जा रही है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय सहायता और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इजरायल और अन्य देश बैठक पर नजर रखे हुए हैं। इस पहल से मध्यपूर्व में शांति की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियां भी बनी हुई हैं।