नई दिल्ली। एनसीआर के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए सरकार अब ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ पर फोकस कर रही है। मेट्रो और रैपिड रेल नेटवर्क के बावजूद यात्रियों के लिए घर से स्टेशन और स्टेशन से ऑफिस तक पहुंचना अब भी बड़ी समस्या बना हुआ है। इसी कमी को पूरा करने के लिए मेट्रो के साथ एक नया मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को डोर-टू-डोर सफर की सुविधा मिलेगी।
गुरुग्राम बनेगा मॉडल सिटी
राष्ट्रीय राजधानी से सटे गुरुग्राम को इस प्रोजेक्ट के मॉडल शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं, राजधानी नई दिल्ली में भी इसकी शुरुआत की तैयारी चल रही है।
शहरी विकास मंत्रालय ने इसके लिए एक मोबाइल एप पर काम शुरू कर दिया है, जिसके माध्यम से यात्रियों को विभिन्न ट्रांसपोर्ट विकल्प एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे।
क्या है ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ योजना
इस योजना के तहत यात्रियों को मेट्रो स्टेशन से सीधे उनके ऑफिस या कॉलोनी तक पहुंचाने के लिए फीडर बसें, ई-रिक्शा, बाइक टैक्सी और कैब सेवाएं शुरू की जाएंगी।
- मोबाइल एप के जरिए तुरंत बुकिंग की सुविधा मिलेगी।
- मेट्रो स्टेशनों पर साइकिल और ई-बाइक स्टैंड बनाए जाएंगे।
- भीड़भाड़ वाले इलाकों में मॉल और ऑफिस हब तक पहुंच के लिए स्काईवॉक और पैदल मार्ग तैयार होंगे।
फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद को भी फायदा
गुरुग्राम और दिल्ली के साथ-साथ यह मॉडल फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में भी लागू किया जाएगा।
- फरीदाबाद के औद्योगिक इलाकों को फीडर बसों और ई-रिक्शा से जोड़ा जाएगा।
- नोएडा में मेट्रो नेटवर्क को स्मार्ट साइकिल और ऑटो शेयरिंग सेवा से मजबूत किया जाएगा।
- गाजियाबाद में रैपिड रेल कॉरिडोर से जुड़े स्टेशनों को कैब और टैक्सी हब से जोड़ा जाएगा।
पीपीपी मॉडल पर होगा क्रियान्वयन
शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार अब हर मेट्रो प्रोजेक्ट के साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी प्लान अनिवार्य किया जाएगा।
यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर लागू होगी।
हर स्टेशन पर मल्टी-मॉडल हब बनाए जाएंगे, जहां से बस, ऑटो, कैब और ई-रिक्शा आसानी से उपलब्ध होंगे।
निजी बिल्डर्स का भी सहयोग
सरकार इस योजना में निजी बिल्डर्स और डेवलपर्स को भी जोड़ने की तैयारी कर रही है। बड़ी हाउसिंग सोसायटी और कॉर्पोरेट ऑफिस अपने स्तर पर शटल सेवाएं और इलेक्ट्रिक वैन चलाएंगे।
कई बिल्डर्स अपनी टाउनशिप में पहले से साइकिल शेयरिंग और कैब स्टैंड की सुविधा दे रहे हैं। सरकार बिल्डर्स को प्रोत्साहन और टैक्स छूट देकर इस योजना में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है।