नई दिल्ली | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Meity) ने भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) को सुझाव दिया है कि रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) PLI योजना में पुराने मैग्नेट की रीसाइक्लिंग को भी शामिल किया जाए। Meity के अनुसार, भारत पहले से ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक देश है और भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बढ़ती मांग के कारण ई-वेस्ट की मात्रा और बढ़ेगी।
रीसाइक्लिंग की अहमियत
Meity ने कहा कि रीसाइक्लिंग से REPM की स्थायी सप्लाई सुनिश्चित होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। भारत 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य रखता है और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
उद्योग पर असर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत की अधिकांश मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां पहले से ही रीसाइक्ल किए गए मैग्नेट का उपयोग कर रही हैं। हालांकि, चीन ने अप्रैल 2025 से इन मैग्नेट्स की सप्लाई पर रोक लगा दी, जिससे ईयरफोन, हेडफोन और स्मार्टवॉच जैसे उत्पाद प्रभावित हुए। कंपनियों ने जल्दी ही नई सप्लाई चैन बनाई, जिससे उत्पादन पर असर सीमित रहा।
भारत में ई-वेस्ट की स्थिति
ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2022 के अनुसार, भारत ने वर्ष 2022 में लगभग 4.17 मिलियन टन ई-वेस्ट उत्पन्न किया, जिससे यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक देश बन गया।
PLI योजना में प्रस्ताव
भारी उद्योग मंत्रालय की प्रस्तावित PLI योजना के तहत भारत में 5 नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनाए जाएंगे, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 6,000 टन प्रति वर्ष होगी। योजना में प्राइवेट कंपनियों को पूंजी सब्सिडी और बिक्री आधारित प्रोत्साहन दिए जाएंगे। Meity चाहता है कि इस योजना में रीसाइक्लिंग भी शामिल हो, लेकिन MHI का कहना है कि रीसाइक्लिंग का प्रबंधन खनन मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
चीन की पाबंदी का प्रभाव
अप्रैल 2025 से चीन ने REPM के निर्यात पर रोक लगा दी है, जिससे भारतीय ऑटो उद्योग, विशेष रूप से EV ट्रैक्शन मोटर्स, पर असर पड़ा है। दुनिया के लगभग 90% REPM चीन में उत्पादित होते हैं।
ICEA की चेतावनी
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने चेतावनी दी है कि REPM सप्लाई में देरी होने पर इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन $138 अरब तक पहुंच गया, जिसमें मोबाइल फोन का योगदान $64 अरब रहा।