28 October, 2025
हिंदू धर्म में कलावा (मौली या रक्षा सूत्र) बांधने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सुरक्षा, शक्ति और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है।
कौन किस हाथ में बांधे कलावा
शास्त्रों के अनुसार —
- पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए।
- वहीं विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधने का नियम बताया गया है।
कलावा बांधते समय जिस हाथ में धागा बांधा जा रहा हो, उस हाथ की मुट्ठी बंद रखनी चाहिए, और दूसरा हाथ सिर पर रखना चाहिए। यह मुद्रा श्रद्धा और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है।
कलावा बांधने का मंत्र और उसका अर्थ
मंत्र: “तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
अर्थ: “मैं यह पवित्र धागा आपको बांधता हूं, जैसे यह राजा बलि को बांधा गया था। यह धागा आपकी रक्षा करे और कभी नष्ट न हो।”
यह मंत्र व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों से बचाता है और जीवन में शुभता का आशीर्वाद प्रदान करता है।
कितनी बार लपेटना चाहिए कलावा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा को 3, 5 या 7 बार कलाई पर लपेटना सबसे शुभ माना जाता है। इन संख्याओं का संबंध त्रिदेव, पंचतत्व और सप्तलोक से जोड़ा जाता है।कलावा बंधवाते समय हाथ की मुट्ठी में दक्षिणा (दान) रखना चाहिए, जो कलावा बांधने वाले व्यक्ति को दी जाती है। यह कर्म पुण्य फल प्रदान करता है।
कलावा कब उतारें
कलावा को किसी भी दिन नहीं उतारना चाहिए। इसे सप्ताह में केवल दो दिन — मंगलवार या शनिवार को ही उतारना शुभ माना गया है। यह दिन मंगल ग्रह (शक्ति) और शनिदेव (रक्षा) से संबंधित होते हैं।
धार्मिक महत्व
कलावा बांधना मात्र एक परंपरा नहीं, बल्कि यह संरक्षण, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान की कृपा का प्रतीक है। माना जाता है कि यह बुरी शक्तियों, नजर दोष और नकारात्मक विचारों से रक्षा करता है।
संक्षेप में:कलावा बांधना एक छोटी सी धार्मिक क्रिया है, लेकिन इसका प्रभाव गहरा और पवित्र होता है। सही विधि से, श्रद्धा और विश्वास के साथ बांधा गया कलावा जीवन में शुभता, शांति और सुरक्षा लेकर आता है।