चंडीगढ़। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को सत्ता में आए एक साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन बेरोजगारी का मुद्दा अब भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में विकास और रोजगार को लेकर कई घोषणाएं की गईं, मगर जमीनी स्तर पर युवाओं को राहत नहीं मिल पाई है।
राज्य में बेरोजगारी दर लगातार ऊंची बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित युवा छोटे पदों के लिए आवेदन कर रहे हैं। हाल ही में हजारों ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट युवाओं ने सफाईकर्मी और चौकीदार जैसे पदों के लिए आवेदन किया, जो राज्य में रोजगार के हालात की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
विश्लेषकों का कहना है कि सरकार की रोजगार योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई हैं। निजी निवेश और औद्योगिक विकास में अपेक्षित तेजी नहीं आई है, जिससे नई नौकरियों के अवसर सीमित रहे हैं। वहीं, विपक्ष लगातार सरकार पर वादे निभाने में नाकाम रहने का आरोप लगा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब राज्य सरकार को केवल नई घोषणाओं पर नहीं, बल्कि मौजूदा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देना होगा। रोजगार सृजन के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्टार्टअप नीतियों को मजबूती देना जरूरी है, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें।
राज्य के युवाओं का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में यह मुद्दा चुनावी एजेंडे का सबसे बड़ा विषय बन सकता है।