Shimla, 4 November
रामपुर बुशहर में 1 से 3 नवम्बर तक आयोजित तीन दिवसीय अश्व प्रदर्शनी का आज सफल समापन हुआ। यह आयोजन आगामी अंतरराष्ट्रीय लवी मेला–2025 के उपलक्ष में किया गया था, जो 11 से 14 नवम्बर तक ऐतिहासिक नगर रामपुर बुशहर में धूमधाम से मनाया जाएगा।समापन समारोह की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश राज्य 7वां वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं रामपुर के विधायक नन्द लाल ने की। उनकी धर्मपत्नी सत्या नन्द लाल भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
अपने संबोधन में नन्द लाल ने कहा कि लवी मेला हिमाचल प्रदेश की व्यापारिक, सांस्कृतिक और पशुपालन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। अश्व प्रदर्शनी इस मेले का अहम हिस्सा है, जो पशुपालकों को उत्कृष्ट नस्लों के संरक्षण और प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ युवाओं को पारंपरिक व्यवसायों से जोड़ने में भी सहायक हैं।प्रदर्शनी का आयोजन पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा अंतरराष्ट्रीय लवी मेला आयोजन समिति, रामपुर बुशहर के सहयोग से किया गया था। प्रदर्शनी में विभिन्न नस्लों के 282 अश्व प्रदर्शित किए गए, जिनमें विशेष रूप से चमुर्थी नस्ल के घोड़े आकर्षण का केंद्र रहे। प्रतिभागियों ने चाल, शक्ति, सौंदर्य और संतुलन का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
प्रदर्शनी के दौरान 121 स्पीति नस्ल, 57 क्रॉस ब्रीड, 46 अन्य नस्लों के अश्व तथा 29 खच्चर जोड़े (कुल 58 खच्चर) प्रदर्शित किए गए। लगभग 150 पशुओं की बिक्री भी संपन्न हुई, जिससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ मिला।समापन दिवस पर गुब्बारा फोड़ और 400 तथा 800 मीटर घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। धर्मपाल और हैप्पी ने क्रमशः प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
इस अवसर पर नन्द लाल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए और कहा कि यह आयोजन हिमाचल की पारंपरिक पहचान को जीवित रखते हैं।कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के निदेशक संजीव धीमान, एसडीएम हर्ष अमरेन्द्र सिंह, उपनिदेशक डॉ. नीरज मोहन, डॉ. अनिल, जिला परिषद सदस्य बिमला शर्मा, एडवोकेट डी.डी. कश्यप, राजेश गुप्ता, समिति सदस्य, पंचायत प्रतिनिधि, व्यापारी, पशुपालक और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
अश्व प्रदर्शनी का ऐतिहासिक महत्व
रामपुर की अश्व प्रदर्शनी सदियों पुराने लवी मेले की परंपरा से जुड़ी है। यह मेला उस ऐतिहासिक व्यापारिक संधि की याद में मनाया जाता है जो रामपुर बुशहर राज्य और तिब्बत के बीच हुई थी। उस समय घोड़े, ऊन और नमक का व्यापार इस क्षेत्र की पहचान था। इसी परंपरा को सहेजने के उद्देश्य से अश्व प्रदर्शनी की शुरुआत की गई, जो आज सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण आयोजन बन चुकी है।