जालंधर। आरटीओ दफ्तर जालंधर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला एक ऐसे युवक से जुड़ा है जो पिछले छह महीनों से कनाडा में रह रहा है, लेकिन इसी दौरान उसके नाम पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया गया। यह खुलासा होने के बाद परिवहन विभाग, विजिलेंस और आरटीओ कार्यालय ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, पक्का बाग इलाके के रहने वाले इस युवक की 13 अक्टूबर को ड्राइविंग टेस्ट की तारीख तय की गई थी, जबकि वह उस समय कनाडा में स्टडी वीजा पर मौजूद था। इसके बावजूद, एजेंटों की मिलीभगत से उसके नाम पर लाइसेंस जारी कर दिया गया।
आरटीओ के रिकॉर्ड से पता चला है कि युवक की जगह किसी अन्य व्यक्ति ने टेस्ट दिया, जिसकी वीडियो को बाद में सिस्टम से हटा दिया गया। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि विभाग के कुछ कर्मचारी भी इस फर्जीवाड़े में शामिल हो सकते हैं।
मामले के उजागर होने के बाद आरटीओ अधिकारियों ने आंतरिक जांच के आदेश जारी किए हैं और संबंधित आवेदक को नोटिस भेजा गया है। इसके साथ ही, यह सवाल भी उठ रहे हैं कि जहां सामान्य आवेदकों को टेस्ट डेट मिलने में महीनों लग जाते हैं, वहीं इस मामले में कुछ ही दिनों में लाइसेंस जारी कैसे कर दिया गया।
प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं और अब विभाग ने इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है ताकि इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का खुलासा किया जा सके।