कांगड़ा-जिला कांगड़ा के दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल में रावी नदी का बढ़ता कटाव अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। गांव के साथ-साथ हेलीपैड पर भी खतरा मंडराने लगा है, लेकिन अब तक किसी ठोस बचाव कार्य की शुरुआत नहीं हो पाई है। स्थानीय ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बरसात से पहले सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में भारी नुकसान हो सकता है।
शुक्रवार को बड़ा भंगाल के ग्रामीण धर्मशाला पहुंचे और एडीसी कांगड़ा के समक्ष अपनी समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द स्थायी समाधान किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि रावी नदी में आई बाढ़ को सात महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बड़ा भंगाल से आई पवना कुमारी और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। नदी के बाएं किनारे पर स्थित सरकारी भवन, स्कूल, सोसायटी और सराय पूरी तरह बह गए थे। इसके अलावा हेलीपैड के पास भी तेज कटाव हुआ था, जिससे अब दाएं किनारे पर बसे गांव को भी खतरा बढ़ गया है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव और हेलीपैड को सुरक्षित रखने के लिए नदी किनारे मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि यदि समय रहते यह कार्य नहीं हुआ, तो बरसात के दौरान हालात और भी खराब हो सकते हैं।
इस मामले पर एडीसी कांगड़ा विनय कुमार ने कहा कि बड़ा भंगाल एक दुर्गम क्षेत्र है और पिछले साल हुए नुकसान के मद्देनजर प्रशासन गंभीरता से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश के माध्यम से क्षेत्र में हुए नुकसान का अध्ययन कराया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद उचित योजना बनाकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।एडीसी ने भरोसा दिलाया कि रिपोर्ट के आधार पर बजट का प्रावधान किया जाएगा और कोशिश की जाएगी कि बरसात से पहले आवश्यक कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि गांव और हेलीपैड को सुरक्षित रखा जा सके।