Mandi, Dharamveer-:हिमाचल प्रदेश के पैरा वर्करों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। धर्मशाला में आयोजित शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलने की उम्मीद लेकर पहुंचे पैरा वर्करों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। हिमाचल प्रदेश पैरा वर्कर कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष विवेक कुमार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने न तो उनकी समस्याएँ सुनीं और न ही उनसे मिलने की कोई कोशिश की।
महासंघ के अनुसार, प्रदेशभर से आए पैरा वर्करों ने 28 नवंबर को तपोवन के पास जोरदार धरना-प्रदर्शन किया था। उनका उद्देश्य केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों को सामने रखना था, लेकिन पूरे दिन इंतजार करने के बावजूद उन्हें मुलाकात का मौका नहीं मिला। केवल विधायक आरएस बाली वहां पहुंचे और उन्होंने आश्वासन देकर कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की, परंतु पैरा वर्करों का कहना है कि बार-बार केवल आश्वासन मिल रहा है, समाधान नहीं।विवेक कुमार ने बताया कि कुछ प्रतिनिधि स्वयं मुख्यमंत्री से मिलकर स्थिति समझाने के लिए आगे बढ़े, लेकिन सीएम ने मुलाकात को प्राथमिकता नहीं दी। उनका आरोप है कि सरकार छोटे कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह रवैया साफ दर्शाता है कि निचले स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों की आवाज को सुनने के प्रति सरकार संवेदनशील नहीं है।
प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि पैरा वर्कर लगातार 68 बार सरकार को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का कोई समाधान सामने नहीं आया। पैरा वर्करों की सबसे बड़ी मांग स्थायी नीति लागू करने की है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पैरा वर्करों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दी थीं, यहां तक कि चार पैरा वर्करों की मृत्यु भी हुई, लेकिन उनके परिवारों को भी कोई सहायता नहीं दी गई।विवेक कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जल्द ही स्थायी नीति पर फैसला नहीं लेती, तो प्रदेश के सभी पैरा वर्कर शिमला में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब धैर्य की सीमा खत्म हो चुकी है और कर्मचारियों की आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।