Shimla, Sanju-:बढ़ती महंगाई का असर रोज़मर्रा की वस्तुओं तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका प्रभाव अब अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। इसी के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता और गदर फ्रंट संस्था के संयोजक रवि कुमार दलित मंगलवार को संजौली स्थित श्मशान घाट में सांकेतिक अनशन पर बैठे। उन्होंने मोक्षधाम में दाह संस्कार के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी के दामों में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।
संजौली का यह श्मशान घाट सनातन धर्म सभा के अधीन संचालित है। पहले यहां एक मन लकड़ी की कीमत 350 रुपये थी, जबकि अब इसे बढ़ाकर 450 रुपये कर दिया गया है। लकड़ी की आपूर्ति और प्रबंधन मोक्षधाम सभाओं के माध्यम से किया जाता है। रवि कुमार ने बताया कि वे इस मुद्दे को पहले ही उपायुक्त शिमला और एसपी के संज्ञान में लिखित रूप में ला चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें श्मशान घाट में ही बैठकर विरोध दर्ज करवाना पड़ा है।उन्होंने कहा कि एक शव का दाह संस्कार करने के लिए लगभग 12 से 14 मन लकड़ी की जरूरत होती है। ऐसे में बढ़ी कीमतों के कारण एक परिवार को करीब 1400 रुपये अतिरिक्त देने पड़ेंगे, जो गरीब और कमजोर वर्ग के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है। रवि कुमार का कहना है कि श्मशान घाट वह स्थान है जहां अमीर-गरीब सभी आते हैं और ऐसे संवेदनशील स्थान पर महंगाई थोपना बेहद अनुचित है।
रवि कुमार दलित ने कहा कि इस प्रकार की वृद्धि सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है। जहां जनता को राहत मिलनी चाहिए, वहां उल्टा बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि बढ़े हुए दाम वापस नहीं लिए गए तो वे जल्द ही अगली रणनीति तय कर बड़े आंदोलन का ऐलान करेंगे।उन्होंने कहा कि उनका सांकेतिक अनशन प्रशासन और सरकार को जगाने के उद्देश्य से है, ताकि दाह संस्कार जैसी अनिवार्य सेवाओं से जनता को राहत मिल सके।