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कैंसर इलाज में बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि, बिना सर्जरी और कीमोथेरेपी नई उम्मीद

नई दिल्ली। कैंसर उपचार के क्षेत्र में जापान के वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है। जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JAIST) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे प्राकृतिक बैक्टीरिया की पहचान की है, जो बिना सर्जरी, कीमोथेरेपी या इम्यूनोथेरेपी के कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है।

अब तक कैंसर के इलाज में ऑपरेशन, कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी को सबसे प्रभावी विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन हालिया शोध शरीर में मौजूद प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों की भूमिका को नई दिशा दे रहा है।

मेंढक की आंत से मिला असरदार बैक्टीरिया

JAIST के प्रोफेसर एजिरो मियाको के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने मेंढक, न्यूट और छिपकली जैसी प्रजातियों की आंत से 45 अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया अलग किए। इनमें से नौ बैक्टीरिया में कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की क्षमता पाई गई। इनमें सबसे प्रभावशाली बैक्टीरिया Ewingella americana रहा, जो जापानी ट्री फ्रॉग की आंत में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है और जिसे किसी भी तरह से जेनेटिक रूप से संशोधित नहीं किया गया।

चूहों पर परीक्षण में मिले चौंकाने वाले नतीजे

शोध के दौरान इस बैक्टीरिया को चूहों में कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज के लिए इंजेक्ट किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, सिर्फ एक डोज से ही ट्यूमर पूरी तरह समाप्त हो गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि यह बैक्टीरिया कीमोथेरेपी की लोकप्रिय दवा डॉक्सोरूबिसिन और आधुनिक इम्यूनोथेरेपी से भी अधिक प्रभावी साबित हुआ।

ऐसे करता है बैक्टीरिया काम

शोध में बताया गया कि ट्यूमर में ऑक्सीजन की कमी वाले हिस्सों में यह बैक्टीरिया तेजी से पनपता है और 24 घंटे के भीतर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है। साथ ही यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर T-सेल, B-सेल और न्यूट्रोफिल्स को ट्यूमर तक पहुंचाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने वाले रसायन छोड़ते हैं।

सुरक्षा को लेकर क्या बोले वैज्ञानिक

सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिकों ने बताया कि यह बैक्टीरिया 24 घंटे के भीतर शरीर से बाहर हो गया और लिवर, किडनी, दिल या फेफड़ों पर कोई गंभीर असर नहीं देखा गया। हल्की सूजन जरूर पाई गई, लेकिन वह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो गई। 60 दिनों की निगरानी अवधि में कोई गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आया।

आगे क्या है राह

हालांकि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और इसे तुरंत इंसानों पर इलाज के रूप में लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन यह अध्ययन भविष्य में कैंसर के उपचार के नए और कम दर्दनाक विकल्पों की उम्मीद जगाता है। वैज्ञानिक अब इस तकनीक को ब्रेस्ट और पैंक्रियाटिक कैंसर पर भी आजमाने की तैयारी कर रहे हैं।

अगर आगे के परीक्षण सफल रहे, तो आने वाले वर्षों में कैंसर का इलाज अधिक प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी हो सकता है।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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