Mandi, Dharamveer-:केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन योजना के तहत जोनल अस्पताल मंडी में प्रस्तावित डिस्ट्रिक्ट इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (DIPHL) का निर्माण कार्य पिछले छह महीनों से पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इस अत्याधुनिक लैब के निर्माण पर करीब सवा करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है, लेकिन कार्यदायी एजेंसी की लापरवाही के चलते अभी तक सिविल कार्य भी पूरा नहीं हो सका है।
यह लैब जोनल अस्पताल मंडी के पुराने गायनी वार्ड में बनाई जा रही है। योजना का उद्देश्य अस्पताल में आने वाले मरीजों को एक ही स्थान पर सभी प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि उन्हें अलग-अलग लैब में भटकना न पड़े। हालांकि, हकीकत यह है कि पिछले दो वर्षों से यह परियोजना सुस्त गति से चल रही है और बीते छह महीनों से काम पूरी तरह बंद पड़ा है। निर्माण एजेंसी द्वारा अब तक केवल तोड़फोड़ का कार्य किया गया है, इसके बाद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।11 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. गोपाल बेरी ने जोनल अस्पताल मंडी का दौरा कर इस परियोजना को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, संबंधित कंपनी द्वारा काम दोबारा शुरू नहीं किया गया, जिससे अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ आम जनता में भी नाराजगी बढ़ रही है।
जोनल अस्पताल मंडी के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि इस परियोजना का निर्माण कार्य एचएलएल कंपनी द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सिविल कार्य पूरा करवा लिया जाएगा, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। डॉ. ठाकुर के अनुसार, लैब के शुरू होने से अस्पताल की जांच सेवाओं में बड़ा सुधार आएगा।वर्तमान में जोनल अस्पताल मंडी में पांच अलग-अलग लैब संचालित की जा रही हैं, जो अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं। इस कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को टेस्ट करवाने और सैंपल जमा करने के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ती है।डीआईपीएचएल लैब के शुरू होने से सभी जांच सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी, जिससे समय की बचत के साथ-साथ मरीजों को काफी राहत मिलेगी।अब देखना यह है कि प्रशासन और निर्माण एजेंसी इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजना को कब तक धरातल पर उतार पाते हैं।