लुधियाना | पंजाब में अब आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूलों में दाखिला आसान हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य शिक्षा विभाग ने गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम से उन बच्चों को शिक्षा के अवसर मिलेंगे जो अब तक महंगे स्कूलों में दाखिले से वंचित थे।
शिक्षा विभाग ने सभी प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपल्स को 12 जनवरी तक रजिस्ट्रेशन करवाने का निर्देश दिया है। रजिस्ट्रेशन के बाद विभाग की ओर से गरीब बच्चों को एडमिशन दिलवाया जाएगा। राइट टू एजुकेशन एक्ट (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25 प्रतिशत गरीब बच्चों के लिए रिजर्व रखना अनिवार्य है।
फरवरी 2025 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए सीटें रिजर्व की जाएँ। हालांकि, पिछले साल शिक्षा सत्र शुरू होने के लगभग 10 महीने बाद भी कई स्कूलों में इन सीटों पर दाखिला नहीं हो सका था। पंजाब में 7,806 गैर-वित्तीय सहायता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें एंट्री लेवल पर लगभग 12 सीटें गरीब बच्चों के लिए रिजर्व रखी जानी चाहिए। अनुमान है कि इससे पहले करीब 1 लाख गरीब बच्चे प्राइवेट स्कूलों में दाखिले से वंचित रहे।
स्कूल संघ पंजाब के को-ऑर्डिनेटर राजेश नागर ने कहा कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शिक्षा सत्र की शुरुआत में पूरी होनी चाहिए थी, ताकि बच्चों को समय पर शिक्षा मिल सके। महासचिव भुवनेश भट्ट ने भी कहा कि विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि RTE के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों को समय पर किताबें, वर्दी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के लिए स्कूलों को निम्न जानकारी अपलोड करनी होगी:
- स्कूल का प्रकार (गर्ल्स, ब्वॉयज, या को-एजुकेशनल)
- पढ़ाई का माध्यम (पंजाबी, अंग्रेजी, या हिंदी)
- मान्यता मिलने का वर्ष
- पिन कोड और स्कूल का पता
- प्रिंसिपल / हेडमास्टर का नाम और संपर्क नंबर
- बोर्ड या विभाग से एफिलिएशन नंबर
- एंट्री क्लास में कुल सीटों की संख्या
- सालाना स्कूल फीस का विवरण
- स्कूल का स्तर (प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी)
पंजाब शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित कराया जाएगा, जिससे उनके शिक्षा के अधिकारों का पालन हो सके और सभी बच्चों को समान अवसर मिल सकें।