ईरान | ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। सख्त कार्रवाई के बीच देश में लागू इंटरनेट ब्लैकआउट को अब 100 घंटे पूरे हो चुके हैं। हालांकि मंगलवार को कुछ मोबाइल नेटवर्क पर विदेश कॉल आंशिक रूप से बहाल होने के संकेत मिले, लेकिन इंटरनेट सेवाएं अब भी पूरी तरह ठप हैं। वैश्विक इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान इस समय लगभग पूर्ण इंटरनेट शटडाउन की स्थिति में है, जहां मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स तक आम लोगों की पहुंच बंद है।
प्रशासन ने केवल इंटरनेट ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक संचार माध्यमों को भी निष्क्रिय कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि वीपीएन के जरिए भी लोग ऑनलाइन नहीं हो पा रहे, क्योंकि नेटवर्क स्तर पर कनेक्टिविटी काट दी गई है। तेहरान में मौजूद कई लोगों ने एसोसिएटेड प्रेस से फोन पर संपर्क तो किया, लेकिन उन नंबरों पर दोबारा कॉल संभव नहीं हो सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि देश में डिजिटल दुनिया से संपर्क लगभग पूरी तरह टूट चुका है।
मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 646 लोगों की जान जा चुकी है। बीते गुरुवार को जैसे ही देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हुए, सरकार ने इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाओं को बंद कर दिया था। इन प्रदर्शनों के चलते ईरान के कई शहरों में तनाव का माहौल बना हुआ है।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव भी बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान, प्रदर्शनकारियों पर दमन को लेकर अमेरिका की चेतावनी के बाद अब वॉशिंगटन से बातचीत करना चाहता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प अब भी खुले हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ उनका संपर्क बना हुआ है, चाहे वह प्रदर्शनों से पहले का दौर हो या बाद का। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन की धमकियां और प्रस्ताव ईरान के लिए स्वीकार्य नहीं हैं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लेविट ने स्वीकार किया कि ईरान के सार्वजनिक बयानों और निजी संदेशों में फर्क है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इन संकेतों का आकलन कर रहे हैं, लेकिन सैन्य विकल्प को खारिज नहीं किया गया है। उधर, ईरान में सरकार समर्थक हजारों लोग सड़कों पर उतरे और सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया। सरकारी टीवी पर प्रसारित तस्वीरों में भीड़ अमेरिका और इज़राइल विरोधी नारे लगाती दिखी।
ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनों में शामिल लोगों को “खुदा का दुश्मन” माना जा सकता है, जो ईरान के कानून के तहत एक गंभीर आरोप है और जिसकी सज़ा मौत तक हो सकती है। इन घटनाक्रमों के बीच ईरान में राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।