नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में पोंगल उत्सव में शिरकत की और तमिल संस्कृति को दुनिया की सबसे पुरानी और समृद्ध सभ्यताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि तमिल सभ्यता में सदियों की परंपरा, ज्ञान और जीवन मूल्यों की गहरी झलक मिलती है, जो इतिहास से सीख लेकर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और राम मोहन नायडू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और तमिल समाज की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री की इस उपस्थिति को दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु के लोगों से संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जहां आने वाले महीनों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पोंगल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, किसान और समाज के बीच संतुलन का प्रतीक है। यह त्योहार हमें पृथ्वी और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें देश की एकता और विश्वास को मजबूती देती हैं, और पोंगल जैसे पर्व इस भावना को और सशक्त करते हैं।
प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि धरती, जल और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मिशन लाइफ, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और अमृत सरोवर जैसी पहल इसी सोच को आगे बढ़ाती हैं और भावी पीढ़ियों के लिए सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
इस अवसर पर हाल ही में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘पराशक्ति’ की टीम भी मौजूद रही। अभिनेता शिवकार्तिकेयन, रवि मोहन और संगीतकार जी.वी. प्रकाश कुमार ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। शिवकार्तिकेयन ने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलना सम्मान की बात है और दिल्ली में पोंगल का आयोजन देश की सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश देता है।