नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 13 हजार करोड़ रुपये की ड्रग्स तस्करी के मामले में वांछित आरोपी तिलक प्रसाद शर्मा को सिक्किम से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कोकीन, मेफेड्रोन और थाई मरिजुआना की अंतरराष्ट्रीय तस्करी में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, इस रैकेट के तार पाकिस्तान, यूनाइटेड किंगडम, मलेशिया, थाईलैंड और यूएई तक फैले हुए हैं।
स्पेशल सेल के अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में 1290 किलोग्राम कोकीन, मेफेड्रोन और करीब 40 किलोग्राम थाई मरिजुआना जब्त की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 13 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। इसी मामले की जांच के दौरान तिलक शर्मा का नाम सामने आया था, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था। अब उसे सिक्किम से गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपी की पहचान 35 वर्षीय तिलक प्रसाद शर्मा के रूप में हुई है, जो सिक्किम के ईस्ट पेंडम का रहने वाला है। दिल्ली की एक अदालत ने उसके खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी कर रखा था। वर्ष 2024 में इस मामले को लेकर भारतीय न्याय संहिता और नार्कोटिक्स अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि तिलक शर्मा कई बार थाई मरिजुआना को सूटकेस में भरकर थाईलैंड से भारत लाने में शामिल रहा है। दिल्ली पहुंचने पर यह खेप हिमांशु नामक आरोपी को सौंपी जाती थी। इसी कड़ी में तुषार गोयल नामक एक अन्य आरोपी का नाम भी सामने आया, जिसके गोदाम से दो सूटकेस भरकर थाई मरिजुआना बरामद की गई थी।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के डिप्टी कमिश्नर अमित कौशिक ने बताया कि इस मामले में अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुछ विदेशी नागरिकों समेत कई आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी संपर्क किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, ड्रग्स की तस्करी बेहद सुनियोजित तरीके से की जाती थी। तिलक शर्मा पहले थाईलैंड से ड्रग्स लेकर श्रीलंका जाता था, फिर वहां से नेपाल के रास्ते भारत में एंट्री करता था। एक बार नेपाल में पकड़े जाने के बाद वह काठमांडु जेल से फरार हो गया और सिक्किम में छिपकर रहने लगा। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि तिलक शर्मा ने 10वीं तक पढ़ाई के बाद आईटीआई की डिग्री ली थी और सिक्किम की एक फार्मा कंपनी में मशीन ऑपरेटर के तौर पर काम करता था। काम की तलाश में दुबई जाने के दौरान वह अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह के संपर्क में आया और धीरे-धीरे इस नेटवर्क का अहम हिस्सा बन गया।