फरीदाबाद। फरीदाबाद में जानवरों के प्रति मानवीय संवेदना और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। जिले के बुढ़ाना गांव में भारत का पहला कुत्तों का श्मशान घाट तैयार किया गया है, जहां आवारा और पालतू कुत्तों को सम्मानजनक अंतिम विदाई दी जाएगी। यह पहल न केवल वफादार जानवरों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है, बल्कि शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को भी बेहतर बनाएगी।
इस श्मशान घाट की खास बात यह है कि यहां पर्यावरण अनुकूल तरीके से अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार में लकड़ी के बजाय गोबर के उपलों का उपयोग होगा, जिससे प्रदूषण कम होगा। यह परियोजना पूर्व आईएएस अधिकारी सुनील गुलाटी के सहयोग से विकसित की गई है और इसे नगर निगम व सीएसआर तथा निजी एनजीओ के सहयोग से संचालित किया जाएगा।
अब तक अक्सर देखा जाता था कि सड़क किनारे खाली प्लॉटों या कूड़े के ढेरों पर मृत कुत्तों के शव पड़े रहते थे, जिससे दुर्गंध फैलती थी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए श्मशान घाट के साथ मॉर्चरी वाहन की भी व्यवस्था की गई है। किसी भी क्षेत्र में कुत्ते की मौत की सूचना मिलने पर नगर निगम की टीम शव को सुरक्षित तरीके से श्मशान घाट तक पहुंचाएगी। इससे सफाई कर्मचारियों और आम नागरिकों दोनों को राहत मिलेगी।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद जिले में कुत्तों की संख्या करीब 50 हजार है, जिनमें पालतू और आवारा दोनों शामिल हैं। रोजाना औसतन एक से दो कुत्तों की मौत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में पड़े शवों से रेबीज और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। यह श्मशान घाट इन खतरों को काफी हद तक कम करेगा।
सोशल वर्कर विनीत खट्टर ने इसे पशु कल्याण की दिशा में अहम कदम बताया। वहीं नगर निगम अधिकारी डॉ. नितेश परमार ने कहा कि भारत में पहली बार फरीदाबाद में कुत्तों के लिए श्मशान घाट बनाया गया है, जिससे शहर की स्वच्छता और स्वास्थ्य व्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यह पहल पूरे जिले के लिए एक मिसाल बनेगी।