Una, Rakesh-:ऊना जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले लाल सिंगी गांव में चल रहा जमीन बंदोबस्त विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया है। गांव में भूमि बंदोबस्त को लेकर उपजे असंतोष के बीच भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर मौजूदा भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती हैं, तो दूसरी ओर पूर्व कांग्रेस विधायक सतपाल रायजादा खुलकर मोर्चा संभाले हुए हैं। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे गांव का माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।
पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने मौजूदा विधायक द्वारा लगाए जा रहे जमीन हड़पने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। रायजादा ने कहा कि यदि विधायक सत्ती अपने आरोपों को लेकर वास्तव में गंभीर हैं, तो उन्हें स्वयं लाल सिंगी गांव आकर जमीन की निशानदेही और पैमाइश करवानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर किसी भी व्यक्ति या परिवार द्वारा सरकारी या शामलात भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, तो उसे हटवाने की जिम्मेदारी मौजूदा विधायक और प्रशासन की बनती है।पूर्व विधायक ने दावा किया कि उनके परिवार ने लाल सिंगी गांव के विकास के लिए वर्षों पहले 47 कनाल जमीन दान की थी, जिसका उपयोग केवल रास्तों और गलियों के निर्माण के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि गांव के अधिकांश रास्ते उनके परिवार की निजी भूमि से होकर गुजरते हैं और किसी भी रास्ते का निर्माण सरकारी जमीन पर नहीं किया गया है। ऐसे में उनके परिवार पर जमीन कब्जाने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित और लोगों को गुमराह करने की साजिश हैं।
रायजादा ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता मौजूदा विधायक के इशारे पर गांव में हो-हल्ला मचा रहे हैं और यह प्रचार किया जा रहा है कि गांव की सड़कों और गलियों को बंद किया जा रहा है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि एक तथाकथित कमेटी बनाकर उनके और उनके परिवार के खिलाफ गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं। पूर्व विधायक ने दो टूक कहा कि लाल सिंगी गांव का भविष्य तय करने का अधिकार केवल गांववासियों को है, न कि बाहरी लोगों को।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गांव में कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्होंने महज पांच कनाल जमीन खरीदी और आज 20 कनाल से अधिक भूमि पर कब्जा जमाए बैठे हैं। रायजादा ने कहा कि विधायक सत्ती को यदि सच में न्याय की चिंता है, तो उन्हें ऐसे मामलों पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि बेवजह राजनीतिक बयानबाजी करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि गांव के लोग हमेशा आपसी भाईचारे के साथ रहे हैं, लेकिन यदि किसी ने जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की, तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने पूर्व विधायक के आरोपों का तीखा जवाब देते हुए कहा कि लाल सिंगी गांव में चल रहा विरोध किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा नहीं, बल्कि जमीन बंदोबस्त प्रक्रिया में भारी खामियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि गांव के लोग इसलिए प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि भूमि बंदोबस्त सही तरीके से नहीं किया जा रहा और किसानों के साथ अन्याय हो रहा है।सत्ती ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन बंदोबस्त के लिए जिन अधिकारियों को तैनात किया गया है, वे वही अधिकारी हैं जिन्हें विजिलेंस ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे दागी अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद बार-बार एक्सटेंशन क्यों दी जा रही है और उन्हें ही बार-बार लाल सिंगी गांव में क्यों लगाया जा रहा है। विधायक ने कहा कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों की कोई कमी नहीं है, फिर भी बार-बार उन्हीं अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है, जिनकी कार्यप्रणाली पहले ही सवालों के घेरे में रही है।
भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि उन्होंने विधानसभा में मुख्यमंत्री से दागी अधिकारियों को एक्सटेंशन दिए जाने को लेकर सवाल उठाया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे हल्के में लेते हुए टाल दिया। सत्ती ने आरोप लगाया कि यह वही राजनीति है, जिसकी शुरुआत करीब 15 साल पहले झूठ के आधार पर की गई थी और आज उसी झूठ की राजनीति का सच गांव के लोग खुद उजागर कर रहे हैं।सत्ती ने पूर्व विधायक से सवाल किया कि यदि उनके परिवार ने वास्तव में गांव के रास्तों के लिए 42 या 47 कनाल जमीन दान की है, तो यह स्पष्ट किया जाए कि जब गांव का जमीनी “लट्ठा” यानी रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है, तो जमीन दान का दावा कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि लाल सिंगी में कभी लगभग 400 कनाल शामलात भूमि हुआ करती थी, लेकिन आज सरकारी रिकॉर्ड में यह भूमि बहुत कम दिखाई दे रही है।
विधायक ने गांव में काटी जा रही कॉलोनियों पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि किसानों को उनकी पुश्तैनी जमीन के बदले कहीं और भूमि दी जा रही है, किसी को स्वां क्षेत्र में जमीन दी जा रही है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि किसानों के कब्जे उनकी पैतृक जमीन पर हैं, इसके बावजूद उन्हें इधर-उधर शिफ्ट किया जा रहा है।सत्ती ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने किसानों को न्याय नहीं दिया, तो भूमि बंदोबस्त में शामिल अधिकारियों का घेराव किया जाएगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पूर्व विधायक होने के नाते रायजादा ने कभी अपने गांव के लोगों से यह जानने की कोशिश की कि वे प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं और आखिर उन्हें कोर्ट के चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं।
लाल सिंगी गांव में चल रहा यह विवाद अब केवल जमीन बंदोबस्त तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी राजनीतिक जंग में तब्दील हो चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले को कैसे सुलझाता है और क्या गांव के लोगों को वास्तव में न्याय मिल पाता है या यह विवाद सियासी बयानबाजी तक ही सिमट कर रह जाएगा।