रोहतक। सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे को लेकर 27 जनवरी को पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच प्रस्तावित बैठक पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रोहतक स्थित डी-पार्क के पास अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए हुड्डा ने कहा कि यह बैठक निराधार है और इसका कोई ठोस औचित्य नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि एसवाईएल नहर को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही हरियाणा के पक्ष में फैसला सुना चुका है। ऐसे में बार-बार बैठकों का आयोजन करने के बजाय प्रदेश और केंद्र सरकार को अदालत के आदेश को पूरी तरह लागू कराना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब फैसला वर्षों पहले आ चुका है, तो अब तक उसे अमल में क्यों नहीं लाया गया।
गणतंत्र दिवस के मौके पर शुभकामनाएं देते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश को शहीदों के बलिदान से आजादी मिली है और संविधान को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को रोका जाना चाहिए। हुड्डा ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरा है।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने हरियाणा की सैनी सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में प्रदेश के हर विभाग में भ्रष्टाचार फैल चुका है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हुड्डा के अनुसार मौजूदा सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई है।
उधर, एसवाईएल नहर विवाद को लेकर होने वाली अहम बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शामिल हो रहे हैं। बैठक में हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी समेत दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं। इस बैठक के नतीजों पर दोनों राज्यों की जनता की नजरें टिकी हुई हैं।