Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर लोक निर्माण विभाग ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और मृत्यु दर को शून्य तक लाने के उद्देश्य से एनआईटी हमीरपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।इस कार्यशाला में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के सभी मंडलों के अधिशासी अभियंता शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ एन.पी.एस. सिंह ने मुख्य अतिथि को हिमाचली टोपी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यशाला के दौरान सड़क सुरक्षा, दुर्घटनाओं के कारण और उनके समाधान से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं।
मीडिया से बातचीत करते हुए लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अधीन लगभग 40 हजार किलोमीटर सड़कों का नेटवर्क है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और राज्य मार्ग शामिल हैं। इन सभी सड़कों पर अब ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जा रहे हैं ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर सड़क सुरक्षा के लिए उपलब्ध फंड का उपयोग करते हुए आवश्यक सेफ्टी उपाय अपनाए जाएंगे। इनमें साइन बोर्ड, क्रैश बैरियर, रोड मार्किंग और अन्य आधुनिक सुरक्षा मानकों को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि हिमाचल प्रदेश की सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाया जाए।
इस मौके पर लोक निर्माण मंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के चौथे चरण के तहत हिमाचल प्रदेश में करीब 1500 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन सड़कों के निर्माण और रखरखाव में आधुनिक तकनीकों और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का प्रयोग किया जाएगा, ताकि सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित किया जा सके।विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश में पूर्व में कई गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें लोगों की जान गई है। इन घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार अब सड़क निर्माण और रखरखाव को लेकर गंभीरता से मंथन कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सेमिनार भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिकारियों को नवीन तकनीकों और बेहतर योजनाओं से अवगत कराया जा सके।