महेंद्रगढ़ | हरियाणा भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर रामबिलास शर्मा ने दक्षिण हरियाणा के नेताओं के बीच चल रही कथित जुबानी जंग को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां हर नेता को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। अलग-अलग विचारों को गुटबाजी या फूट कहना गलत है, क्योंकि भाजपा किसी ‘वन मैन शो’ की पार्टी नहीं, बल्कि अनुशासन के दायरे में चलने वाला जीवंत लोकतंत्र है।
रामबिलास शर्मा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 2024 के विधानसभा चुनाव में उनका टिकट कटने से समर्थकों में निराशा देखी जा रही है। हालांकि, उनका राजनीतिक और सामाजिक जीवन हमेशा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठन के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने 15 जून 1970 को विवाह किया, लेकिन महज 14 दिन बाद 29 जून 1970 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में रोहतक चले गए और जीवनभर संघ कार्य में समर्पित रहे।
आपातकाल के दौरान 30 नवंबर 1975 को रोहतक जिले के आठ संघ कार्यकर्ताओं को झज्जर थाने में अवैध रूप से बंद किए जाने के विरोध में गुप्त रणनीति बनी। इस जिम्मेदारी को तत्कालीन संघ प्रचारक प्रो. रामबिलास शर्मा ने निभाया। नाहड़ चौकी पर पुलिस द्वारा घेरकर उन पर लाठीचार्ज किया गया, जिसकी खबर अखबारों में प्रमुखता से छपी। इसके दबाव में सरकार को झज्जर थाने में बंद कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी दिखाकर उन्हें जेल भेजना पड़ा।
प्रो. शर्मा को झज्जर जेल से बाद में मीसा कानून के तहत अंबाला जेल भेजा गया, जहां उन्हें गंभीर यातनाएं दी गईं। जेल में हुए अत्याचारों का विवरण सामने आने के बाद प्रदेशभर में रोष फैल गया। सरकार ने उन्हें बिहार की गया जेल स्थानांतरित कर दिया, जहां भी उन्हें कठोर यातनाएं सहनी पड़ीं। 18 जनवरी 1977 को संघ पर से प्रतिबंध हटने और देश में चुनाव होने के बाद उनकी रिहाई हुई।
रिहाई के बाद उन्होंने उसी वर्ष महेंद्रगढ़ विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा, जिसमें वे 673 मतों से पराजित हुए। 1982 में वे पहली बार विधायक बने और इसके बाद पांच बार महेंद्रगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। 1991 में प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने भाजपा को सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़वाया, जिससे हरियाणा में पार्टी को नई पहचान मिली।
5 जनवरी 2013 को वे दोबारा हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। विधायक दल की बैठक में उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मनोहर लाल के नाम का मुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्ताव रखा, जबकि स्वयं इस दौड़ से बाहर रहे।
अटल सरकार बचाने में अहम भूमिका
अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए लोकसभा में समर्थन जुटाने के दौरान प्रो. रामबिलास शर्मा की भूमिका ऐतिहासिक रही। हरियाणा की राजनीतिक परिस्थितियों में संतुलन बनाकर उन्होंने केंद्र में भाजपा सरकार को मजबूती देने में निर्णायक योगदान दिया।
2024 में टिकट कटने के बावजूद प्रो. रामबिलास शर्मा का जीवन भाजपा और संघ के प्रति निष्ठा, संघर्ष और संगठनात्मक समर्पण की मिसाल माना जाता है।