नई दिल्ली। तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम का उत्तर भारतीयों को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कथित तौर पर कहा कि उत्तर भारत के लोग केवल हिंदी जानते हैं, इसी वजह से उन्हें बेहतर नौकरियां नहीं मिलतीं और वे तमिलनाडु में आकर टेबल साफ करने, निर्माण कार्य में मजदूरी करने या पानी-पूड़ी बेचने जैसे काम करने को मजबूर होते हैं।
मंत्री ने यह टिप्पणी चेंगलपट्टू जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के लोग तमिलनाडु में छोटे-मोटे काम करते हैं क्योंकि उन्होंने केवल हिंदी सीखी है। वहीं, उन्होंने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के बच्चे अंग्रेजी में बेहतर पकड़ होने के कारण विदेशों में जाकर अमेरिका और लंदन जैसे देशों में लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।
मंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में दो-भाषा बनाम तीन-भाषा नीति को लेकर बहस पहले से ही तेज है और विधानसभा चुनाव भी नजदीक बताए जा रहे हैं।
भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंत्री के बयान को अपमानजनक बताते हुए कहा कि किसी भी राज्य के नागरिक को उनके काम के आधार पर नीचा दिखाना गलत है।
उन्होंने लिखा कि आज के भारत में देश के हर हिस्से के लोग अलग-अलग राज्यों में काम कर रहे हैं और कोई भी काम छोटा नहीं होता। भाजपा ने डीएमके पर आरोप लगाया कि वह प्रवासी मजदूरों, खासकर उत्तर भारतीयों और हिंदी भाषियों को निशाना बनाकर समाज में विभाजन फैलाने की राजनीति कर रही है।
फिलहाल मंत्री के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और इस मुद्दे पर आगे और बयानबाजी होने की संभावना जताई जा रही है।