नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, युद्ध जैसी परिस्थितियों और कच्चे तेल की आपूर्ति में संभावित बाधाओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि यदि अचानक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाए, तब भी भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे देश करीब 74 दिनों तक बिना किसी परेशानी के अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है।
मंत्री ने बताया कि यह स्टॉक भारत की रणनीतिक तैयारियों का हिस्सा है और किसी भी आपात स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में मदद करेगा।
तेल खपत में तीसरे नंबर पर भारत
हरदीप सिंह पुरी ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत आज कच्चे तेल की खपत के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। वहीं रिफाइनिंग क्षमता के लिहाज से भारत चौथे स्थान पर पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तेल आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह पेट्रोलियम सेक्टर में एक मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने की तैयारी
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत हर साल करीब 26 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल की रिफाइनिंग कर रहा है। सरकार की योजना इसे बढ़ाकर 32 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंचाने की है।
इसके साथ ही भारत पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी लगातार मजबूत हो रहा है और इस क्षेत्र में टॉप-5 देशों में शामिल है।
भूमिगत रणनीतिक भंडार बना सुरक्षा कवच
उन्होंने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए हैं। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) द्वारा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तीन प्रमुख स्थानों पर करीब 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल सुरक्षित रखा गया है।
90 दिन का स्टॉक लक्ष्य, आगे बढ़ेगी क्षमता
हालांकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किसी भी देश के पास 90 दिनों का तेल भंडार होना चाहिए, लेकिन मंत्री ने कहा कि फिलहाल 74 दिनों का बैकअप भारत को सुरक्षित स्थिति में रखता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आने वाले समय में इस क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर भारत की जनता और अर्थव्यवस्था पर न पड़े।