शिमला, संजू-:हिमाचल प्रदेश में आरडीजी बंद होने की संभावनाओं के बीच प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य की वित्तीय हालत पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। एक ओर सुक्खू सरकार आर्थिक संकट के लिए पूर्व भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं भाजपा ने मौजूदा सरकार पर गंभीर आर्थिक कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि सलाहकारों के गलत मार्गदर्शन के कारण प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हुई है। उनका आरोप है कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में विकास कार्यों की गति धीमी पड़ी है और सरकार ने संसाधनों का उपयोग प्राथमिकताओं के बजाय राजनीतिक नियुक्तियों और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने में किया है।बिंदल ने मुख्य संसदीय सचिव नियुक्तियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने कानूनी विवादों के बावजूद इन नियुक्तियों को जारी रखा, जिसके कारण मामला न्यायालय तक पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने बड़ी संख्या में वकीलों की नियुक्ति की है और इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उनके अनुसार लगभग 100 से अधिक वकील विभिन्न मामलों में सरकार की पैरवी कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में बाहरी वकीलों को भी नियुक्त करना पड़ा है।
इसके अलावा भाजपा ने निगमों और बोर्डों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों की बढ़ती संख्या पर भी सवाल उठाए हैं। बिंदल का कहना है कि इन नियुक्तियों पर भी भारी व्यय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आपदा राहत के लिए बड़ी घोषणाएं कीं, लेकिन वास्तविक खर्च अपेक्षाकृत कम रहा। साथ ही, प्रचार-प्रसार पर अधिक खर्च करने का आरोप भी लगाया गया।महिलाओं को 1500 रुपये देने की गारंटी का जिक्र करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी, तो चुनाव के दौरान बड़ी-बड़ी गारंटियां क्यों दी गईं।
बिंदल ने हिम केयर और सहारा जैसी योजनाओं में कटौती तथा कुछ संस्थानों के बंद होने को भी सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। उनका कहना है कि राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।भाजपा का दावा है कि आरडीजी को लेकर पूर्व में भी सिफारिशें होती रही हैं, लेकिन वर्तमान सरकार इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है। कुल मिलाकर, प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है।