रोहतक | रोहतक में फरवरी के मध्य में अचानक हुई बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। तेज धूप और गर्मी के बाद सुबह 8 बजे से हुई बूंदाबांदी ने तापमान में गिरावट ला दी और ठंडक का अहसास करवा दिया। रोहतक, सांपला, महम, कलानौर और लाखनमाजरा सहित जिले के कई क्षेत्रों में हुई हल्की बारिश ने न केवल गर्मी से राहत दी, बल्कि शीतल हवाओं ने मौसम को और ठंडा कर दिया।
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का असर आमजन के जीवन के साथ-साथ खेती, स्वास्थ्य और स्थानीय व्यापार पर भी देखा गया। पिछले कुछ दिनों से जिले का तापमान लगातार बढ़ रहा था और दोपहर के समय पंखे चलाने तक की नौबत आ रही थी। बुधवार की बारिश के बाद अधिकतम तापमान में लगभग 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार बारिश के दौरान वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ और धूल कण बैठने के कारण हवा पहले के मुकाबले काफी साफ महसूस हुई। बरसात के आंकड़ों के मुताबिक रोहतक में 6 मिलीमीटर, महम में 2 मिलीमीटर, सांपला में 6 मिलीमीटर, कलानौर और लाखनमाजरा में क्रमशः 1-1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सरसों की फसल पकने की कगार पर है, जबकि गेहूं में दाने बनना शुरू होने वाला है। हल्की बारिश से सरसों को अधिक नुकसान नहीं होगा, बल्कि ठंडक से दानों के विकास में मदद मिलेगी। हालांकि किसानों को खेतों में सिंचाई रोकने, तेज हवा और नमी के कारण फसल गिरने के खतरे से सावधान रहने और कीटों के नियंत्रण के लिए नियमित निरीक्षण करने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अचानक तापमान में गिरावट से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे गले में संक्रमण, खांसी और वायरल बुखार बढ़ सकते हैं। हवा में नमी और पराग कणों की सक्रियता के कारण दमा रोगियों और सांस की समस्या वाले बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
व्यापार पर भी बारिश का असर साफ देखा गया। रोहतक और आसपास के शहरों के बाजारों में ग्रामीण क्षेत्रों से ग्राहकों की कमी के कारण दुकानों में सन्नाटा पसरा रहा। रेहड़ी-फड़ी और छोटे दुकानदारों का काम दिनभर बाधित हुआ, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद एहतशाम के अनुसार, आने वाले 24 से 48 घंटों तक बादल छाए रह सकते हैं और शीतल हवाओं का दौर जारी रहेगा। जिले के मुख्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव ने जीवन की गति धीमी की, लेकिन प्रदूषण में राहत और फसलों के लिए अनुकूल मौसम इसके सकारात्मक पहलू हैं।