नई दिल्ली | पिछले साल उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती की थी, जिससे साबुन, तेल, बिस्किट और अन्य रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें कम हुईं। मगर अब स्थिति बदल रही है और FMCG कंपनियों ने कई उत्पादों की कीमतें बढ़ाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इनपुट लागत में लगातार वृद्धि और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब जीएसटी कटौती लागू हुई थी, तब कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखीं या कुछ उत्पादों में कटौती भी की। लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और परिवहन खर्च में इजाफे के कारण अब यह बोझ उपभोक्ताओं पर डालना पड़ रहा है। इस बदलाव के चलते साबुन, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स, डिटर्जेंट और अन्य जरूरी सामान की कीमतों में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि जीएसटी कटौती के बाद कई FMCG उत्पादों की बिक्री में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब बढ़ती लागत ने कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। उदाहरण के लिए, डाबर इंडिया ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में लगभग दो प्रतिशत बढ़ोतरी की है। वहीं टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने भी हाल ही में अपने कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ा दी हैं।
हिंदुस्तान यूनिलीवर ने भी घोषणा की है कि होम केयर प्रोडक्ट्स जैसे सर्फ एक्सेल, रिन, विम और डोमेक्स की कीमतें जल्द ही बढ़ेंगी। कंपनी के अनुसार, उच्च कीमत वाले पैकेट पहले ही मार्केट में उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर खर्च का बोझ बढ़ेगा, लेकिन कंपनियों के लिए यह आवश्यक कदम है ताकि वैश्विक कच्चे माल और परिवहन लागत के दबाव के बीच संचालन जारी रखा जा सके।