गुरुग्राम। हरियाणा में वर्ष 2018 से पहले जारी किए गए खेल ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की अब व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। खेल निदेशक कार्यालय ने सभी जिला खेल अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 2018 से पूर्व बनाए गए ग्रेडेशन प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच की जाए।
यह जांच विशेष रूप से उन कर्मचारियों पर केंद्रित है, जिन्होंने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न भर्तियों के माध्यम से खेल कोटे के तहत नौकरी हासिल की थी। अधिकारियों के अनुसार, पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें संदिग्ध परिस्थितियों में ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जारी किए गए थे। इसी पृष्ठभूमि में अब पुराने प्रमाणपत्रों की वैधता और पात्रता की दोबारा पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेशभर में करीब 2000 से अधिक मामलों की जांच की जा रही है। इनमें कुछ ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने खेल प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की, लेकिन बाद में ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जमा कराने को कहा गया। कुछ मामलों में खेल विभाग ने ग्रेडेशन जारी करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद विवाद की स्थिति बनी।
गुरुग्राम, रेवाड़ी, नूंह, पलवल, फरीदाबाद और महेंद्रगढ़ जिलों से संबंधित लाभार्थियों की जांच के विशेष आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों को दस दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश हैं। जांच में यह परखा जाएगा कि संबंधित खिलाड़ी वास्तव में उस ग्रेड के पात्र थे या नहीं और प्रमाणपत्र नियमानुसार जारी किए गए थे या नहीं।
खेल विभाग के अनुसार, किसी प्रतियोगिता में पदक के आधार पर ए, बी, सी या डी ग्रेडेशन दिया जाता है, जिसका लाभ कॉलेज प्रवेश और सरकारी नौकरी में खेल कोटे के तहत मिलता है। खेल उपनिदेशक गुरुग्राम मंडल गिर्राज सिंह ने बताया कि जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी और नियमों के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई तय होगी।