केंद्र के खिलाफ ग्रामीणों ने सोमवार को हमीरपुर के उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ से मिलकर अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि पंचायत क्षेत्र में इस केंद्र के निर्माण की योजना से ग्रामीण असंतुष्ट हैं। लगभग 600 ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर केंद्र को प्रस्तावित स्थल पर न खोलने की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि इस निर्णय से पहले न तो पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा की गई और न ही आम लोगों की राय ली गई। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि स्थानीय लोगों की भावनाओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए।स्थानीय निवासी पवन कुमार ने बताया कि केंद्र खोलने की जानकारी उन्हें बाद में मिली। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर केंद्र प्रस्तावित है, वहां बच्चों और युवाओं के लिए खेल और मनोरंजन का मैदान विकसित किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि युवाओं के पास बेहतर खेल सुविधाएं होंगी, तो वे स्वतः ही नशे जैसी बुराइयों से दूर रहेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि नशा निवारण केंद्र को मेडिकल कॉलेज जोलसप्पड़ के परिसर में स्थापित किया जाए, जिससे उपचार और चिकित्सकीय सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों।
पूर्व सैनिक मनोहर लाल ने बताया कि केंद्र के लिए लगभग 17 कनाल भूमि चिन्हित की गई है। उनका कहना है कि इस स्थान पर केंद्र बनने से सामाजिक और अन्य प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने भी प्रस्तावित स्थल पर खेल मैदान बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि खेल गतिविधियां युवाओं को सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन करने में मदद कर सकती हैं।प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से आग्रह किया कि ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रस्ताव पर सोच-समझकर निर्णय लिया जाए। उन्होंने प्रशासन से यह भी कहा कि पंचायत की योजना और स्थानीय जनभागीदारी के बिना किसी बड़े फैसले को लागू करना उचित नहीं है।
इस प्रकार, जोलसप्पड़ के ग्रामीण अपने क्षेत्र में प्रस्तावित नशा निवारण केंद्र के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आपत्ति व्यक्त कर चुके हैं और प्रशासन से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।