राहुल चावला, धर्मशाला-:एचआरटीसी के बेड़े में जल्द ही नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं। इन बसों में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई अहम बदलाव किए गए हैं। खास बात यह है कि बसों में लगेज बॉक्स की जगह दो अतिरिक्त सीटें लगाई जाएंगी, जिससे सीटिंग क्षमता बढ़कर 32 हो जाएगी। साथ ही पीछे बैठने वाले यात्रियों को सामने की ओर बेहतर दृश्यता भी मिल सकेगी।यह जानकारी एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा ने सोमवार को धर्मशाला में आयोजित नई इलेक्ट्रिक बस के ट्रायल के दौरान दी।
वर्कशॉप में निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि नई बसों में सवार होने वाले यात्रियों की सहूलियत के लिए एंट्री स्टेप को ऊपर-नीचे करने की सुविधा दी गई है, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को विशेष लाभ मिलेगा।
उपाध्यक्ष ने बताया कि प्रदेशभर में इन बसों का ट्रायल किया जा रहा है। ट्रायल के दौरान बसों की परफॉर्मेंस, एवरेज और तकनीकी खामियों का आंकलन किया जाएगा। विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ यह रिपोर्ट तैयार करेंगे कि किस रूट पर बस ने कितना औसत दिया। उन्होंने बताया कि नई इलेक्ट्रिक बसों से 180 किलोमीटर तक की एवरेज मिलने की संभावना है, हालांकि शिमला क्षेत्र में कुछ स्थानों पर 173-174 किलोमीटर तक का औसत सामने आया है।
अजय वर्मा ने कहा कि ट्रायल के दौरान बसों में पाई जाने वाली 10 से 12 कमियों को कंपनी के संज्ञान में लाया जाएगा, ताकि अंतिम सप्लाई से पहले आवश्यक सुधार किए जा सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि अप्रैल के अंत तक 50 प्रतिशत नई इलेक्ट्रिक बसें एचआरटीसी के बेड़े में शामिल हो जाएंगी।नई बसों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बेहतर बैटरी बैकअप है। पहले की इलेक्ट्रिक बसें एक बार चार्ज होने पर 120 से 125 किलोमीटर तक चलती थीं, जबकि नई बसें कम समय में चार्ज होकर लगभग 180 किलोमीटर तक दौड़ सकेंगी।
रूट निर्धारण की प्रक्रिया फिलहाल जारी है और इस पर विभाग के आरएम और डीएम कार्य कर रहे हैं। कोशिश की जा रही है कि इन बसों को पठानकोट और होशियारपुर तक भी संचालित किया जाए। इसके अलावा पुराने फ्लीट को चरणबद्ध तरीके से बदलने और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन बसों को चलाने की योजना है। प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस की लागत करीब 1.71 करोड़ रुपये है और इसकी मेंटेनेंस संबंधित कंपनी द्वारा की जाएगी।