मंडी, 23 फ़रवरी -:हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दिल्ली स्थित हिमाचल सदन में आयोजित एआई समिट के दौरान कुछ युवकों के ठहरने और प्रदर्शन से जुड़े मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है।
मंडी से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि जिस स्थान पर स्वयं मुख्यमंत्री ठहरे हों, वहां कथित तौर पर असामाजिक तत्वों को कमरा मिलना और हंगामा होना चिंताजनक है। उन्होंने इसे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न बताते हुए पूछा कि क्या यही सरकार का घोषित ‘व्यवस्था परिवर्तन’ है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ गतिविधियों में शामिल लोगों को यदि सरकारी अतिथि गृह में ठहराया गया, तो यह राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।उन्होंने कहा कि इस मामले में पैसों के कथित लेन-देन की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन परिस्थितियों में प्रदर्शनकारियों को वहां ठहरने की अनुमति मिली और क्या इसके पीछे किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण था। जयराम ठाकुर का कहना है कि बिना प्रभावशाली समर्थन के ऐसे संवेदनशील परिसर में ठहरना संभव नहीं हो सकता।
प्रदेश की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है। साथ ही उन्होंने मांग की कि दिल्ली पुलिस और संबंधित केंद्रीय एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच करें और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करें।जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की गरिमा और सुरक्षा से समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की कि सरकारी अतिथि गृह में हुई घटनाओं के लिए जवाबदेही किसकी है।