हमीरपुर, अरविन्द-: जिला परिषद वार्डों की नई सूची जारी होने के बाद हमीरपुर ब्लॉक में बनाए गए वार्डों को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति दर्ज करवाई है। क्षेत्र के प्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने एडीसी हमीरपुर को ज्ञापन सौंपते हुए ताल वार्ड के पुनर्गठन की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान स्वरूप में ताल वार्ड अत्यधिक बड़ा है, जिससे प्रशासनिक और विकासात्मक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
ज्ञापन में बताया गया कि पुनर्गठन के बाद हमीरपुर जिला में कुल 18 जिला परिषद वार्ड बनाए गए हैं। इनमें ताल वार्ड को सबसे बड़ा वार्ड बनाया गया है, जिसमें 21 पंचायतों को शामिल किया गया है। जबकि अन्य वार्डों में पंचायतों की संख्या 9 से 15 के बीच है। हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में केवल दो वार्ड—जंगल रोपा और ताल—निर्धारित किए गए हैं। जंगल रोपा वार्ड में 12 पंचायतें शामिल हैं, जबकि ताल वार्ड में 21 पंचायतों को समाहित कर दिया गया है, जो संतुलन की दृष्टि से उचित नहीं माना जा रहा।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या और विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वार्डों का गठन किया जाना चाहिए। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ताल वार्ड में शामिल 21 पंचायतों की कुल जनसंख्या 32,775 थी। वर्तमान अनुमान के अनुसार यह संख्या 40 हजार के पार पहुंच चुकी होगी। इतनी अधिक आबादी को एक ही वार्ड में रखने से विकास योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन कठिन हो सकता है।
लोगों ने सुझाव दिया है कि ताल वार्ड को विभाजित कर चमनेड़ को अलग जिला परिषद वार्ड घोषित किया जाए। प्रस्ताव के अनुसार एक नए वार्ड में 11 पंचायतें तथा दूसरे में 10 पंचायतें शामिल की जाएं। इससे दोनों वार्डों में समान रूप से विकास कार्यों का वितरण संभव हो सकेगा और प्रशासनिक कार्यों में भी सुगमता आएगी।समाजसेवी बलदेव धीमान ने कहा कि जिला परिषद को मिलने वाला बजट जब 21 पंचायतों में विभाजित होगा तो प्रत्येक पंचायत को अपेक्षित संसाधन नहीं मिल पाएंगे। इससे विकास कार्यों में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि जिला में 18 की बजाय 19 जिला परिषद वार्ड बनाए जाएं और हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में जंगल रोपा, ताल तथा चमनेड़—तीन वार्ड गठित किए जाएं।स्थानीय प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे आगे की रणनीति तय करने को बाध्य होंगे। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत निर्णय लेगा, जिससे क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।