राहुल चावला, धर्मशाला-:धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से बारिश न होने के कारण जल शक्ति विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। विभाग को आशंका है कि यदि ड्राई स्पेल इसी तरह जारी रहा तो इस बार पेयजल संकट तय समय से पहले दस्तक दे सकता है। आमतौर पर 15 अप्रैल के बाद जिन क्षेत्रों में पानी की कमी महसूस की जाती थी, वहां इस वर्ष मार्च के पहले या दूसरे सप्ताह से ही स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
जल शक्ति विभाग ने संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए अग्रिम रणनीति बनानी शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों से पहले ही जल स्रोतों के घटते स्तर को देखते हुए योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। वर्तमान में दो से तीन पेयजल योजनाएं ऐसी हैं, जहां जल उपलब्धता में कमी के चलते वितरण समय में लगभग 10 मिनट की कटौती की गई है। हालांकि अधिकांश योजनाएं अभी सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।विभाग के अनुसार, सबसे पहले स्प्रिंग (चश्मों) पर आधारित पेयजल योजनाएं प्रभावित होती हैं। इसके बाद छोटे नालों और खड्डों पर निर्भर योजनाओं पर असर दिखाई देता है। ब्यास, न्यूगल और बनेर खड्ड जैसे बड़े स्रोतों पर आधारित योजनाओं पर फिलहाल ड्राई स्पेल का सीमित प्रभाव है। यदि सूखा लंबा खिंचता है, तो छोटी योजनाओं को बड़ी पेयजल योजनाओं से इंटरलिंक कर आपूर्ति बनाए रखने की तैयारी की जा रही है।जल शक्ति विभाग कांगड़ा जोन के मुख्य अभियंता दीपक गर्ग ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि बारिश नहीं हुई तो अप्रैल के मध्य में आने वाली समस्या इस बार मार्च में ही सामने आ सकती है। विभाग का प्रयास रहेगा कि लोगों को न्यूनतम असुविधा हो और पेयजल आपूर्ति सुचारु बनी रहे।