चंडीगढ़ | हरियाणा में तृतीय श्रेणी की नौकरियों के लिए आयोजित सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) को लेकर इन दिनों व्यापक चर्चा हो रही है। इस परीक्षा की पारदर्शिता और महत्व को लेकर तब और ध्यान आकर्षित हुआ, जब यह जानकारी सामने आई कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बेटे अनिकेत सैनी ने भी परीक्षा के लिए आवेदन किया था। हालांकि 26 और 27 जुलाई को आयोजित परीक्षा में वह शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उस समय वह दिल्ली की एक लॉ कंपनी में इंटर्नशिप कर रहे थे। अनिकेत वर्तमान में बीए-एलएलबी द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। आवेदन के बावजूद परीक्षा में शामिल न हो पाने का मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राज्य में विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकारी नौकरियों में बाहरी राज्यों के युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है और हरियाणा के युवाओं की अनदेखी हो रही है। इन आरोपों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया है। उनका कहना है कि जब हरियाणा के युवाओं को अन्य राज्यों में अवसर मिल सकते हैं, तो मेरिट के आधार पर अन्य राज्यों के युवाओं को हरियाणा में अवसर मिलना भी स्वाभाविक है। सरकार का दावा है कि हरियाणा लोक सेवा आयोग के आंकड़ों के अनुसार बाहरी अभ्यर्थियों का चयन प्रतिशत केवल दो से तीन प्रतिशत है, जबकि अधिकांश पदों पर प्रदेश के युवाओं का चयन हुआ है।
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अनुसार राज्य में प्रतिवर्ष 15 से 16 हजार 500 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। इनमें लगभग 15 हजार पद कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से और एक से डेढ़ हजार पद लोक सेवा आयोग के जरिए भरे जाते हैं। अब तक कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 1.60 लाख से अधिक तथा लोक सेवा आयोग द्वारा करीब 18 हजार नियुक्तियां की जा चुकी हैं।
वर्ष 2022 में मनोहर लाल के कार्यकाल में पहली बार सीईटी का आयोजन किया गया था। इसके बाद 2025 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। सरकार अब चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए भी सीईटी कराने की तैयारी में है। तृतीय श्रेणी सीईटी के लिए इस बार 13.48 लाख युवाओं ने आवेदन किया था। इनमें से लगभग 12 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी और करीब आठ लाख सफल रहे। सफल अभ्यर्थियों के लिए 13 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, जबकि लगभग 10 हजार पदों पर जल्द नियुक्तियां निकाली जाएंगी। परीक्षा परिणाम लगभग 92 प्रतिशत रहा।
आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह के नेतृत्व में परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराई गई। सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और बिना सिफारिश तथा बिना अनावश्यक खर्च के पात्र युवाओं को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मेरिट आधारित नियुक्तियों की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।