Summer Express,फरीदाबाद | हरियाणा में तेजी से बस रही अवैध कालोनियों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में पिछले 10 वर्षों के दौरान विकसित हुई अवैध कालोनियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश की जाए। साथ ही उस अवधि में संबंधित जिलों में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों का पूरा विवरण भी मांगा गया है।
हाई कोर्ट ने यह निर्देश अवैध कालोनियों के मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए। यह याचिका गुरुग्राम निवासी अशोक मुंजाल ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध कालोनियां बस रही हैं, लेकिन संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं करते।
अदालत ने एंटी करप्शन ब्यूरो से सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी देने को कहा है। इनमें पिछले एक दशक में प्रत्येक जिले में बसाई गई अवैध कालोनियों की संख्या, उस समय तैनात रहे अधिकारियों का विवरण, इन कालोनियों से सरकार को हुए संभावित राजस्व नुकसान का आकलन, अवैध निर्माण रोकने के लिए उठाए गए कदम, आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में हुई देरी के कारण, दर्ज मामलों की वर्तमान स्थिति और उनके अंतिम परिणाम की जानकारी शामिल है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रदेश के सभी जिलों में प्रशासन से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला प्रशासन को पत्र भेजकर अवैध कालोनियों से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार यह रिपोर्ट मार्च के अंत तक अदालत में पेश की जानी है। माना जा रहा है कि जांच में यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
एंटी करप्शन ब्यूरो फरीदाबाद के अधीक्षक अनिल यादव ने बताया कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रदेश में अवैध कालोनियों से संबंधित डाटा एकत्र किया जा रहा है और संबंधित अधिकारियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। तैयार रिपोर्ट नियत समय पर अदालत में प्रस्तुत की जाएगी।