शिमला, संजू -: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल, आईजीएमसी शिमला में गैस संकट के कारण कैंटीन पूरी तरह ठप हो गई है। अस्पताल में रसोई गैस (LPG) सिलेंडरों की अनुपलब्धता के चलते मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे अस्पताल में एक तरह की खाने-पीने की आपातस्थिति पैदा हो गई है, और मरीजों के साथ तीमारदारों को भी इलाज के दौरान भूख से जूझना पड़ रहा है।
कैंटीन संचालक महेंद्र चौहान, जो पिछले 25 वर्षों से अस्पताल की कैंटीन चला रहे हैं, ने बताया कि उनके कार्यकाल में यह पहली बार है जब इतनी गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि “हमने कोविड जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी कैंटीन को बंद नहीं होने दिया, लेकिन आज सिलेंडरों की कमी के कारण काम पूरी तरह रुक गया है।”महेंद्र चौहान के अनुसार, कैंटीन केवल मरीजों और तीमारदारों के लिए ही नहीं है, बल्कि डॉक्टर और अस्पताल के अन्य कर्मचारी भी यहां भोजन के लिए आते हैं। गैस न होने की वजह से 8 से 10 कर्मचारियों की नौकरी पर भी संकट पैदा हो गया है और प्रतिदिन आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि अस्पताल की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए गैस की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए।
दूर-दराज से आए तीमारदारों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं। ऊना से आई सोनू, जो अपनी माता का इलाज करवा रही हैं, ने बताया कि मरीज को अकेला छोड़कर बाहर खाना ढूंढना लगभग असंभव है। कैंटीन में न गर्म पानी है, न दूध और न ही ताजा भोजन, जिससे तीमारदार मानसिक और शारीरिक रूप से थकान महसूस कर रहे हैं। अन्य अस्पताल आगंतुक भी मानते हैं कि प्रशासन को स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसी बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए।
गैस संकट की वजह से आईजीएमसी की कैंटीन में खाना पकाना ठप हो गया है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को अस्पताल में रहते हुए भी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। महेंद्र चौहान और तीमारदारों दोनों ने प्रशासन और IOC से जल्द से जल्द समाधान की मांग की है, ताकि इस संकट का प्रभाव कम किया जा सके और अस्पताल की सामान्य सेवाएं पुनः सुचारू हो सकें।
मुख्य बिंदु:
संकट: गैस सिलेंडरों की कमी से आईजीएमसी कैंटीन में खाना पकाना बंद।
प्रभाव: दूर-दराज से आए तीमारदारों को गर्म पानी और दूध तक नहीं मिल पा रहा।
मांग: प्रशासन और IOC से तुरंत गैस आपूर्ति बहाल करने की अपील।
इस समस्या के निराकरण में देरी मरीजों और तीमारदारों के लिए गंभीर असुविधा पैदा कर रही है और अस्पताल के कर्मचारियों पर भी आर्थिक दबाव डाल रही है।