Summer Express,चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने विदेशों में असमय मृत्यु का शिकार होने वाले युवाओं के परिवारों को राहत देने के लिए अहम निर्णय लिया है। अब वैध रूप से विदेश गए और वहां जान गंवाने वाले युवाओं के आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार विशेष कल्याण कोष का गठन करने जा रही है, जिसकी रूपरेखा तैयार करने का काम शुरू हो चुका है।
सरकार का यह कदम लगातार बढ़ रहे उन मामलों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जिनमें हरियाणा के युवा विदेशों में जाकर असामयिक मौत का शिकार हो रहे हैं। खासतौर पर अवैध तरीके से विदेश जाने यानी ‘डंकी रूट’ के चलते यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। जानकारी के अनुसार, अब तक एक हजार से अधिक युवा अमेरिका सहित अन्य देशों से डिपोर्ट किए जा चुके हैं।
डंकी रूट पर रोक लगाने के लिए सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसे विदेश सहयोग विभाग के माध्यम से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं को सुरक्षित और वैध तरीके से विदेश भेजने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
राज्य के कई जिलों जैसे यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल और करनाल में अवैध तरीके से विदेश जाने के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। बिना पर्याप्त जानकारी और प्रशिक्षण के विदेश जाने वाले युवाओं को वहां भाषा और कार्य से जुड़ी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें कम स्तर के काम करने पड़ते हैं।
इसी समस्या के समाधान के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से जल्द ही विदेशी भाषा प्रशिक्षण योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चों को भाषा प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, विदेश जाने से पहले युवाओं को संबंधित देश के नियम, संस्कृति और कार्य प्रणाली की जानकारी देने के लिए प्री-डिपार्चर ओरियंटेशन ट्रेनिंग सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
सरकार ने वर्ष 2026-27 के दौरान ओमान, कुवैत, जर्मनी और स्पेन जैसे देशों में रोजगार के नए अवसर तलाशने की योजना बनाई है। वहीं, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इजराइल और दुबई को फिलहाल प्राथमिकता सूची से बाहर रखा गया है।
सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से न केवल युवाओं को सुरक्षित रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि अवैध प्रवासन पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।