Summer Express, सोनीपत। जिले के बड़वासनी गांव और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों के आतंक के चलते लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। गांव जौली के रहने वाले सुनील पर उस समय बंदरों ने हमला कर दिया, जब वह नहर के पास बंदरों को केले खिला रहे थे। अचानक हुए हमले में बंदरों ने उनके दोनों हाथों पर काट लिया, जिसके बाद उन्हें नागरिक अस्पताल में भर्ती कर एंटी रेबीज सीरम लगाया गया।
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से बड़वासनी गांव और आसपास के इलाकों में बंदरों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले भी जॉगिंग करने गए एक युवक पर बंदरों ने हमला कर दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक गांव में 25 से अधिक लोग बंदरों के हमले का शिकार हो चुके हैं। पंचायत विभाग द्वारा बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर जारी किया गया है, लेकिन अब तक केवल आधे बंदरों को ही पकड़ा जा सका है।
इसी तरह शहर में भी आवारा कुत्तों का खतरा बना हुआ है। विकास नगर में रहने वाले नरेंद्र पर उस समय कुत्ते ने हमला कर दिया जब वह सुबह घर से पास के प्लॉट की ओर जा रहे थे। इस हमले में उनके पैर पर कई जगह काटने के निशान आए, जिसके बाद उन्हें भी नागरिक अस्पताल में उपचार के साथ एंटी रेबीज वैक्सीन और सीरम दिया गया। हाल ही में कुत्ते के काटने से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुत्ते या बंदर के काटने के गंभीर मामलों में एंटी रेबीज सीरम लगाया जाता है। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में पहले जहां हर महीने 8 से 10 ऐसे मरीज आते थे, वहीं मार्च में यह संख्या बढ़कर करीब 20 तक पहुंच गई है। मरीजों की बढ़ती संख्या और सीरम की कमी के कारण कई लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग समूह बनाकर चलने को मजबूर हैं, जबकि शहर में लोग अपने घरों और कोठियों में सुरक्षा के लिए लोहे के जाल लगवा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के दावों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं देखा जा रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।