Summer express,चंडीगढ़ | हरियाणा में रिहायशी प्लॉट पर लागू ‘स्टिल्ट प्लस फोर’ पॉलिसी के तहत दी जाने वाली सभी नई मंजूरियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने यह निर्णय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 2 अप्रैल को जारी अंतरिम आदेश के बाद लिया है।
विभाग के निदेशक चंद्र शेखर खरे के अनुसार, जब तक हाईकोर्ट से इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक इस नीति के तहत कोई नई अनुमति जारी नहीं की जाएगी। हालांकि, जिन आवेदकों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और जिनका निर्माण कार्य जारी है, उन पर यह रोक लागू नहीं होगी।
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ‘स्टिल्ट प्लस फोर’ से जुड़े नए आवेदन, लेआउट प्लान, जोनिंग प्लान और सर्विस प्लान को मंजूरी नहीं दी जाएगी। साथ ही सभी संबंधित एजेंसियों, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP), हाउसिंग फॉर ऑल, नगर निकाय और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (HSIDC)को निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
यह फैसला हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें ‘सुनील सिंह बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा व अन्य’ मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फिलहाल इस पॉलिसी को आगे बढ़ाने से रोक दिया गया था। अदालत ने अपने अवलोकन में कहा था कि मौजूदा शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से ही दबाव में है, और अतिरिक्त फ्लोर जोड़ने से सीवरेज, ड्रेनेज, ट्रैफिक और बाढ़ जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के अधिक ऊंचाई वाले निर्माण की अनुमति देना शहरों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इस फैसले से नए मकान बनाने की योजना बना रहे लोगों, बिल्डर्स और डेवलपर्स को बड़ा झटका लगा है। कई परियोजनाएं फिलहाल अनिश्चितता के दौर में हैं।
विभाग ने एचएसवीपी से इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए तैयार एसओपी की प्रति और वर्ष 2024 में टीसीपी विभाग द्वारा हस्तांतरित 689.80 करोड़ रुपये के उपयोग की स्थिति की जानकारी भी मांगी है। इसका उद्देश्य अगली सुनवाई से पहले विस्तृत और मजबूत तैयारी करना है, ताकि कोर्ट में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा जा सके।
वहीं, इस नीति को लेकर स्थानीय स्तर पर भी विरोध देखने को मिल रहा है। कुछ संगठनों का कहना है कि पुराने सेक्टरों में सड़क, सीवरेज और पानी की व्यवस्था पहले से ही दबाव में है। ऐसे में अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण से समस्याएं और बढ़ सकती हैं और आसपास के मकानों पर भी असर पड़ रहा है।