Summer Express, नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने एक दशक से चल रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त करते हुए 10 साल पुरानी शादी को अमान्य घोषित कर दिया है। अदालत ने इस मामले की जटिलता और पक्षकारों के बीच लंबे समय से चल रही कड़वाहट को देखते हुए इसे “महाभारत के युद्ध” जैसा करार दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यह विवाह व्यवहारिक रूप से समाप्त हो चुका था और इसे बनाए रखना केवल दोनों पक्षों के लिए और अधिक पीड़ा का कारण बनता।
सुनवाई के दौरान पीठ ने पति के व्यवहार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक पेशेवर वकील होने के बावजूद उसने अपनी कानूनी विशेषज्ञता का उपयोग प्रतिशोध और विवाद को बढ़ाने के लिए किया, जिससे मामला और अधिक जटिल होता गया।
अदालत ने यह भी देखा कि इस विवाद से जुड़े कुल 80 से अधिक मुकदमे विभिन्न अदालतों में लंबित थे, जिन्हें अब समाप्त कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी दीवानी और आपराधिक मामलों सहित संबंधित एफआईआर को रद्द करते हुए इस पूरे विवाद का अंतिम निपटारा किया।
फैसले में कोर्ट ने दोनों बेटों की पूरी कस्टडी पत्नी को सौंपी है, जबकि पति को बच्चों से मिलने का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही पति को पत्नी और बच्चों के भविष्य के लिए कुल 5 करोड़ रुपये की राशि देने का निर्देश भी दिया गया है, जो एकमुश्त या चार किस्तों में एक वर्ष के भीतर अदा करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह संदेश भी दिया कि कानून का उपयोग न्याय के लिए होना चाहिए, न कि प्रतिशोध या किसी को परेशान करने के साधन के रूप में।