Summer Express,फरीदाबाद | फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 11 दिन बीत जाने के बाद भी छात्रों को नई किताबें नहीं मिल पाई हैं। किताबों की अनुपलब्धता के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले के फरीदाबाद और बल्लभगढ़ ब्लॉक में कुल 378 सरकारी स्कूल संचालित हैं, जहां करीब 1.25 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नए सत्र की शुरुआत के साथ ही दाखिला प्रक्रिया भी चल रही है, लेकिन अब तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी किताबों की आपूर्ति नहीं पहुंची है। इससे स्पष्ट नहीं है कि स्कूलों में किताबें कब तक उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्थिति यह है कि छात्र फिलहाल पुरानी और अधूरी किताबों तथा नोट्स के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई स्कूलों में प्रमोट हुए विद्यार्थियों की पुरानी किताबें नए छात्रों को दी जा रही हैं, जिनमें कई पन्ने गायब हैं और कुछ किताबें बेहद जर्जर स्थिति में हैं। कई विद्यालयों में तो सभी विद्यार्थियों को पुरानी किताबें भी उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
शिक्षकों को मजबूरी में नोट्स और वैकल्पिक सामग्री के जरिए पढ़ाई करानी पड़ रही है, जिससे पाठ्यक्रम समय पर पूरा होने को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि किताबें समय पर नहीं पहुंचीं तो इसका सीधा असर परीक्षा परिणामों पर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि सरकारी नियमों के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं और इन्हें मार्च के दूसरे सप्ताह तक स्कूलों में पहुंच जाना चाहिए था, ताकि नए सत्र की शुरुआत सुचारू रूप से हो सके।
पिछले वर्ष भी किताबें देरी से मिलने के कारण छात्रों को आधे सत्र तक इंतजार करना पड़ा था, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। इस बार भी वही स्थिति दोहराई जा रही है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि किताबों की डिमांड पहले ही भेजी जा चुकी है और अगले सप्ताह तक किताबें जिले में पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद उन्हें स्कूलों में वितरित किया जाएगा। फिलहाल विद्यार्थियों को पुरानी किताबों के सहारे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। इस देरी ने न केवल शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावित किया है, बल्कि अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है।