Summer Express,नई दिल्ली। देशभर के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है। केंद्रीय जल आयोग के 9 अप्रैल के ताजा बुलेटिन के अनुसार, इन जलाशयों में कुल जल भंडारण घटकर 82.02 अरब घन मीटर रह गया है, जो कुल क्षमता का मात्र 44.71 प्रतिशत है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले महीनों में कई क्षेत्रों में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
फरवरी के बाद से जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले दो महीनों में इसमें करीब 22 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। देश के अधिकांश नदी बेसिन अब 30 से 60 प्रतिशत क्षमता के बीच ही रह गए हैं, जबकि बिहार का चंदन डैम पूरी तरह सूख चुका है।
हालांकि आयोग का कहना है कि स्थिति पिछले वर्ष और 10 वर्षों के औसत की तुलना में अभी भी बेहतर है, लेकिन जल स्तर में तेज गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।
देश के प्रमुख जलाशयों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। असम का खांडोंग 28%, कर्नाटक का तातिहल्ला 16%, केरल का पेरियार 33%, तमिलनाडु का शोलायर 13% और वैगई 26% क्षमता पर है। तेलंगाना का प्रियदर्शिनी जुराला 42% और पश्चिम बंगाल का कांग्साबाती 34% पर दर्ज किया गया है।
राज्यों के स्तर पर सबसे अधिक गिरावट पंजाब (73.72%) और राजस्थान (47.82%) में दर्ज की गई है। इसके अलावा महाराष्ट्र में 45.55%, हिमाचल प्रदेश में 30.69%, गुजरात में 26.33%, मध्य प्रदेश में 23.79% और बिहार में 22.81% की गिरावट दर्ज की गई है।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार दक्षिण भारत सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां जल भंडारण 59.16% से घटकर 33.63% रह गया है। वहीं उत्तर, पूर्व, पश्चिम और मध्य भारत में भी जल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।
नदी बेसिनों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। तापी, गंगा, महानदी, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी और कृष्णा सहित सभी प्रमुख बेसिन इस समय 60 प्रतिशत से कम क्षमता पर हैं। सिंधु और ब्रह्मपुत्र बेसिन भी औसत स्तर से नीचे बने हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी-फरवरी में कम बारिश, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए बढ़ते पानी के उपयोग के कारण जल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। हालांकि पिछले साल अच्छे मानसून के कारण जलाशय भरे हुए थे, लेकिन इस वर्ष शुरुआती महीनों में अधिक खपत के चलते भंडारण तेजी से कम हुआ है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल उपयोग और प्रबंधन पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले गर्मी के महीनों में कई राज्यों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।