शिमला,संजू-:लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जारी बहस के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के बयान से राजनीतिक माहौल और तेज हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री महिला सांसदों से दूरी बनाकर संसद में उपस्थित नहीं होते, तो स्वयं को महिला हितैषी कैसे कहा जा सकता है।
नेगी ने कहा कि संसद में पूर्व में भी लोकसभा स्पीकर द्वारा यह टिप्पणी की गई थी कि प्रधानमंत्री को महिला सांसदों से खतरा महसूस होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं और यह विधेयक राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लाया गया है।
मंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 में यह विधेयक संसद से पारित हो चुका है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। उनके अनुसार सीटों के परिसीमन और अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा विधेयक राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लाया गया है और इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीतिक मंशा है। नेगी ने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।चेस्टर हिल्स मामले पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस प्रकरण में पहले ही जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। जिला प्रशासन और एसडीएम को पूरी स्वतंत्रता दी गई है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।मंत्री ने कहा कि यह मामला बड़ा और संवेदनशील है, इसलिए कुछ लोग इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होगी और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर पलटवार करते हुए नेगी ने कहा कि फोन टैपिंग से जुड़े मामले में यदि कार्रवाई अपेक्षित है तो संबंधित पक्ष को लोकायुक्त के समक्ष हलफनामा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान और उनका सही उपयोग आवश्यक है।
नेगी ने केंद्र सरकार पर सूचना के अधिकार कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की जो व्यवस्था पहले बनी थी, उसे धीरे धीरे प्रभावित किया जा रहा है, जिससे जनता का भरोसा संस्थानों पर कमजोर हो रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसे संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव पड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।इस बयानबाजी के बाद राज्य और केंद्र की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष इस मुद्दे को महिला आरक्षण और लोकतांत्रिक पारदर्शिता से जोड़ रहा है जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक बयान बता रहा है ।