Summer Express,फरीदाबाद। एनआईटी-3 क्षेत्र में एक विधवा महिला को साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ में फंसाकर करीब 24 लाख रुपये की ठगी का शिकार बना लिया। आरोपियों ने खुद को एनआईए और एटीएस अधिकारी बताकर महिला को आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने का डर दिखाया।
जानकारी के अनुसार, महिला को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को पंचकूला पुलिस चौकी का इंस्पेक्टर बताया और कहा कि उसके नाम से गंभीर साइबर अपराध हुआ है, जिसके चलते गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इस झूठे दावे से महिला बुरी तरह डर गई।
इसके बाद ठगों ने उसे लगातार वीडियो कॉल पर रखा और खुद को विभिन्न जांच एजेंसियों के अधिकारी बताकर पूछताछ करते रहे। इस दौरान महिला को लगभग 24 घंटे तक निगरानी में रखा गया, यहां तक कि उसे बाथरूम जाने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती थी।
ठगों ने दावा किया कि उसके मोबाइल नंबर से 500 से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं और आतंकवादी गतिविधियों में उसका इस्तेमाल हुआ है। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर उसे ‘केस सुलझाने’ के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
डर के चलते महिला ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर करीब 24 लाख रुपये आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी ठग और पैसे की मांग करते रहे।
जब आरोपियों ने और 98 हजार रुपये की मांग की, तो महिला ने अपने भाई से मदद मांगी। भाई ने कारण पूछा तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। परिजनों ने तुरंत उसे वीडियो कॉल काटने को कहा और पुलिस से संपर्क किया।
मामले की शिकायत के बाद एनआईटी साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी जांच की जा रही है।
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर विश्वास न करें और खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वालों से सतर्क रहें।