Summer express, नई दिल्ली | देश के शहरी विकास को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने अर्बन चैलेंज फंड और क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम की शुरुआत की है। इस पहल को हरियाणा समेत देशभर के राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण विकास योजना माना जा रहा है।
सरकार ने इस योजना के तहत 1 लाख करोड़ रुपये का शहरी चुनौती कोष तैयार किया है, जिसके माध्यम से करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। खास फोकस देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर होगा।
इस फंड को शहरी बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है। इसके तहत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए संसाधन जुटाने की सुविधा मिलेगी।
इसके साथ ही CRGSS स्कीम छोटे शहरों को क्रेडिट गारंटी सपोर्ट प्रदान करेगी, जिससे वे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी भागीदारी कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह फंड पारंपरिक अनुदान मॉडल से आगे बढ़कर शहरों को निवेश के लिए तैयार और वित्तीय रूप से सक्षम बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य मजबूत शहरों के बिना संभव नहीं है।
योजना के तहत केंद्रीय सहायता परियोजना लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, जबकि शेष फंड का कम से कम 50 प्रतिशत म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और PPP मॉडल से जुटाया जाएगा। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा बल्कि निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
कुल फंड में से 90,000 करोड़ रुपये सीधे परियोजनाओं पर, 5,000 करोड़ रुपये परियोजना तैयारी और क्षमता निर्माण पर तथा 5,000 करोड़ रुपये क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम के लिए निर्धारित किए गए हैं।
इस योजना के तहत पुराने शहरों का पुनर्विकास, शहरी परिवहन व्यवस्था, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, स्वच्छता और जल आपूर्ति ढांचा, गैर-मोटर चालित परिवहन और जलवायु अनुकूल विकास जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि केवल वे ही परियोजनाएं आगे बढ़ें जो व्यवहारिक, प्रभावी और आर्थिक रूप से मजबूत हों, ताकि उनका दीर्घकालिक असर सुनिश्चित किया जा सके।
यह महत्वाकांक्षी योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य भारत के शहरों को भविष्य के मजबूत आर्थिक केंद्रों और विकास इंजन के रूप में विकसित करना है।