Summer express, मुंबई | पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भी बाजार दबाव में रहा और लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 805 अंक यानी 1.04 प्रतिशत गिरकर 76,858 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 216 अंक टूटकर 23,956 के आसपास कारोबार करता दिखा। इससे पहले भी पिछले सत्र में बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके चलते बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 4 लाख करोड़ रुपये घट गया है।
इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। एचसीएल टेक और इन्फोसिस के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टीसीएस और सन फार्मा भी दबाव में रहे। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, पावरग्रिड, भारती एयरटेल, बीईएल और टेक महिंद्रा जैसे बड़े शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
हालांकि, कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती भी देखी गई। एसबीआई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और इंडिगो जैसे स्टॉक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने इस गिरावट के बीच अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। मिडकैप इंडेक्स में 0.16 प्रतिशत और स्मॉलकैप में 0.26 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली का दबाव मुख्य रूप से लार्जकैप शेयरों तक सीमित रहा।
विदेशी बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिसका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 94.21 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.10 पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार पर दबाव का बड़ा कारण बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई हैं। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, और इसी कारण ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।