Summer express /शिमला, संजू -: भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों में चिंता का माहौल बन गया है। 27 अप्रैल को हुए इस समझौते के तहत सेब आयात पर शुल्क में कटौती और तय कोटा लागू किए जाने से स्थानीय बागवानों को अपने कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है।
हिमाचल प्रदेश सरकार में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश के बागवानों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। समझौते के अनुसार, भारत टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के भीतर न्यूज़ीलैंड से आयातित सेब पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करेगा। उनका कहना है कि यह कदम सीधे तौर पर स्थानीय उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को प्रभावित कर सकता है।नेगी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री भले ही हिमाचल को अपना घर बताते हों, लेकिन ऐसे फैसलों में प्रदेश के हितों का ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि न्यूज़ीलैंड में सेब उत्पादन का समय हिमाचल के सीज़न से मेल खाता है, जिससे बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और स्थानीय बागवानों को नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूज़ीलैंड में आधुनिक तकनीकों के कारण सेब की उत्पादकता 50 से 70 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच जाती है, जबकि हिमाचल में यह औसतन 7 से 8 टन प्रति हेक्टेयर है। ऐसे में सस्ते आयातित सेब घरेलू बाजार पर दबाव बना सकते हैं। भारत का सेब उद्योग हिमालयी क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इस बदलाव के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।
वहीं, मंत्री ने आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर भी विश्वास जताया कि राज्य सरकार के कामकाज के आधार पर कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में ठोस प्रयास किए हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम चुनावों में देखने को मिलेगा।