Summer express, अंकुर कपूर , चंडीगढ़ I चंडीगढ़ में हरियाणा की झज्जर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और कांग्रेस नेता गीता भुक्कल ने विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय समितियों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद आवश्यक हैं, जिससे वे अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
उन्होंने लोकतंत्र के लिए आयोजित प्रशिक्षण संस्थान के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं होती और ऐसे प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने सदन के नियमों और प्रक्रियाओं के सख्त पालन पर जोर देते हुए कहा कि ये सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं और इनका पालन अनिवार्य है।
गीता भुक्कल ने संसदीय समितियों को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य शामिल होते हैं, जिससे यह गंभीर चर्चा और सहयोग का प्रभावी मंच बनता है। उन्होंने कहा कि इन समितियों के पास उच्च अधिकारियों, यहां तक कि अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर तक के अधिकारियों को बुलाकर जवाबदेही तय करने की शक्ति होती है, जिससे कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
इसके साथ ही उन्होंने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को भी बेहद अहम बताया। उनका कहना था कि विपक्ष उतना ही जरूरी है जितना कि सत्तारूढ़ दल, और जब सत्ता पक्ष संवैधानिक मानकों को नजरअंदाज करता है, तब विपक्ष को अपनी जिम्मेदारी निभाने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।