Summer express/शिमला,संजू -:हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव संपन्न होने के बाद भी इससे जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने राज्य सरकार की एक नई अधिसूचना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव कर कुछ पंचायतों में मौजूदा जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ा दिया गया, जिससे प्रशासनिक और संवैधानिक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने सरकार के इस कदम को लोकतांत्रिक व्यवस्था और पंचायती राज संस्थाओं की भावना के विपरीत बताया है।
भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं संविधान के तहत संचालित होती हैं और इनके चुनाव तथा कार्यकाल से जुड़े प्रावधान स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने चुनाव प्रक्रिया के बीच नियमों में संशोधन करते हुए 6 जून को एक अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के तहत जिला चंबा के पांगी क्षेत्र, लाहौल-स्पीति के केलांग उपमंडल तथा कुल्लू जिले की कुछ पंचायतों में पंचायत प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद सदस्यों का कार्यकाल 18 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।डॉ. जनक राज का कहना है कि जिन क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां पुराने और नए प्रतिनिधियों की स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस निर्णय से लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंची है और पंचायती राज संस्थाओं की गरिमा प्रभावित हुई है। विधायक ने कहा कि यदि सरकार इस अधिसूचना को वापस नहीं लेती है तो वह इस मामले को न्यायालय में चुनौती देंगे।
इसके अलावा बीडीसी, जिला परिषद और शहरी निकायों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के चुनाव में हो रही देरी को लेकर भी डॉ. जनक राज ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन चुनावों को जानबूझकर टाला जा रहा है ताकि चुने हुए प्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर सत्ता पक्ष अपने समर्थकों को इन महत्वपूर्ण पदों पर बैठा सके।उन्होंने कहा कि जनता ने जिन प्रतिनिधियों को चुना है, उनके जनादेश का सम्मान होना चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। डॉ. जनक राज ने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली से लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।