Summer express,लुधियाना। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से प्राप्त इनपुट और आधिकारिक शिकायत के आधार पर देशभर में फैले एक बड़े वित्तीय अनियमितता और संदिग्ध धन शोधन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के माध्यम से करीब 3,089.57 करोड़ रुपये के लेन-देन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
ईडी के सहायक निदेशक सूरज कुमार यादव द्वारा भेजी गई शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई संदिग्ध संस्थाओं और शेल कंपनियों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन किए गए। इन संस्थाओं में समान पते, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी का इस्तेमाल होने की बात भी जांच में सामने आई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क का उपयोग कथित तौर पर फर्जी जीएसटी इनवॉइस तैयार करने, संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन करने और विभिन्न खातों के माध्यम से धन के प्रवाह को छिपाने के लिए किया गया। मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की विभिन्न शाखाओं में संचालित एपीएमसी खातों से जुड़े लेन-देन भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि इन खातों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर और निकाली गई।
इसके अलावा अन्य बैंकों के खातों से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। मामले में कई व्यक्तियों और कुछ अज्ञात संस्थाओं को नामजद किया गया है। एफआईआर में अमित कुमार गोयल, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल, गुरदीप सिंह और बलवंत सिंह समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
जांच के दौरान एजेंसियों ने संबंधित दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक खातों की जानकारी अपने कब्जे में लेकर कई खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित रूप से हेराफेरी की गई राशि का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।