Summer express, मोनिका रावत, चंडीगढ़। मोहाली के रियल एस्टेट सेक्टर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच ने हलचल मचा दी है। एक दर्जन से अधिक बड़े बिल्डर ईडी की रडार पर हैं, जबकि पिछले छह वर्षों में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) द्वारा जारी किए गए सभी चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मामलों की फाइलें भी जांच एजेंसी के दायरे में आ गई हैं। जांच का फोकस केवल बिल्डरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीएलयू मंजूर करने और बकाया वसूली में कथित ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
सूत्रों के अनुसार ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि विभिन्न आवासीय और मेगा प्रोजेक्ट्स में लगाया गया निवेश कहां से आया, धन के स्रोत क्या थे और आयकर तथा जीएसटी नियमों का पालन किया गया या नहीं। एजेंसी ने गमाडा अधिकारियों से यह भी पूछा है कि डिफॉल्टर घोषित किए जा चुके बिल्डरों से डेवलपमेंट चार्ज और अन्य बकाया राशि की वसूली समय पर क्यों नहीं की गई।
गमाडा ने हाल ही में 20 से अधिक बिल्डरों और परियोजनाओं को डिफॉल्टर सूची में शामिल किया है। 31 मई 2026 तक के रिकॉर्ड के अनुसार विभिन्न कॉलोनाइजरों और प्रमोटरों पर 312.47 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी दर्ज है। इनमें कई कंपनियों पर 20 करोड़ से लेकर 127 करोड़ रुपये तक का बकाया है।
वहीं मेगा प्रोजेक्ट्स श्रेणी की सात परियोजनाओं पर 701 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी सामने आई है। इनमें बाजवा डेवलपर्स, जनता लैंड प्रमोटर्स, सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबस प्रोजेक्ट्स और प्रीत लैंड प्रमोटर्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। सबसे अधिक बकाया बाजवा डेवलपर्स के दो मेगा प्रोजेक्ट्स पर 377 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।
ईडी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि सीएलयू और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई और बकाया वसूली में देरी के पीछे क्या कारण रहे। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।